बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बृहस्पतिवार को 90 टॉपर्स को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। कोरोना के साये में हुए इस कार्यक्रम में कुलाधिपति राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के साथ मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने वर्चुअल शिरकत कर मेधावियों का हौसला बढ़ाया। विशिष्ट अतिथि ऋषिकेश एम्स के निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि डिग्री सिर्फ एक सीढ़ी है। मानवता का विकास करने वाला व्यक्ति ही कामयाब कहलाने का हकदार है।
कोविड प्रोटोकॉल के तहत आयोजित होने वाले 18वें दीक्षांत समारोह की महीने भर से तैयारियां चल रही थीं। राजभवन से 15 अप्रैल की तिथि निर्धारित होने के बाद 27 समितियां बनाकर समारोह को सफल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दो गज की दूरी के नियम के तहत बृहस्पतिवार को परिसर में सिर्फ कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों को ही प्रवेश दिया गया। सुबह 10 बजे के बाद कुलपति प्रो. केपी सिंह की अगुवाई में कार्य परिषद और विद्या परिषद के पदाधिकारियों की शोभायात्रा मंच पर पहुंची। इसके बाद मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम शुभारंभ किया गया। कुलाधिपति के आदेश पर कुलपति ने एक-एक कर विभागाध्यक्षों से उपाधि धारकों को वर्चुअली उपाधि वितरित कराईं। इसके बाद स्वर्ण पदक विजेताओं को मंच पर आमंत्रित किया गया।
79 टॉपर्स पहुंचे पदक लेने, 11 रहे अनुपस्थित
कुलाधिपति, डिप्टी सीएम, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने ऑनलाइन और एम्स के निदेशक और कुलपति ने ऑफलाइन मंच से मेधावियों को स्वर्ण पदक और उपाधि प्रदान की। विभिन्न विषयों के 11 मेधावी किन्हीं कारणों के चलते अनुपस्थित रहे। उन्हें बाद में पदक प्रदान करने की जानकारी दी गई। समारोह में उपस्थित 79 मेधावी पदक से नवाजे गए। सोशल मीडिया समेत यू-ट्यूब पर समारोह का लाइव प्रसारण हजारों लोगों ने देखा। राज्यपाल समेत लाइव जुड़े लोगों ने कोविड महामारी के दौरान प्रोटोकॉल के तहत सफल आयोजन पर विश्वविद्यालय प्रशासन को बधाई दी।
कोविड प्रोटोकॉल के पालन के लिए लोगों को जागरूक करें विद्यार्थी
कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति अंगीकार करने और उसके क्रियान्वयन पर विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना की। कहा, नई शिक्षा नीति भविष्य की मांग है। उन्होंने कोविड महामारी के चलते शैक्षिक सत्र 2021-22 के प्रभावित होने के बावजूद विश्वविद्यालय की ओर से ऑनलाइन पठन-पाठन, ट्रेनिंग, वर्कशॉप, ऑनलाइन लिखित एवं मौखिक परीक्षा कराने की भी सराहना की। विद्यार्थियों समेत सभी लोगों को कोविड प्रोटोकॉल अपनाकर खुद को बचाते हुए दूसरों को बचाव के लिए प्ररित करने को कहा। शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों को टीकाकरण कराने और वैक्सीन की बर्बादी रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने को कहा। पीएम मोदी के टीबी मुक्त भारत बनाने के अभियान के लिए विश्वविद्यालय और सभी संबद्ध कॉलेजों को एनएसएस के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार करने को कहा।
दादा के समय की शिक्षा नीति अब प्रासंगिक नहीं
डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने भी नई शिक्षा नीति की सराहना की। कहा, जो शिक्षा दादा के समय थी, वही पिता के समय रही। लिहाजा अब उसे बदलने की जरूरत है। एक वक्त पर सब कुछ पुराना हो जाता है, क्योंकि विकास परिवर्तन से ही होता है। इसे देखते हुए नई शिक्षा नीति लागू की गई है। ताकि छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम हो। छात्र रट्टा मार पढ़ाई न करके समय की मांग के अनुसार गुणवत्ता परक शिक्षा हासिल कर सकें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत को शिक्षा के क्षेत्र में महाशक्ति बनाने का काम करेगी। कहा, किसी भी संस्थान के लिए उसके छात्र ही ब्रांड एंबेसडर होते हैं, क्योंकि यही छात्र सफल होकर बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री या प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवा देते हैं तो उस संस्थान को उनकी सफलता से जोड़ा जाता है। उन्होंने कोविड से बचाव के लिए 15 मई तक परीक्षा स्थगित करने और ऑनलाइन पढ़ाई कराने पर जोर दिया।
भारत में भी छात्र करें शिक्षक की ग्रेडिंग
ऋषिकेश एम्स के निदेशक पद्मश्री प्रो. रविकांत ने कहा कि विदेशों में छात्र शिक्षकों की ग्रेडिंग करते हैं। उसी आधार पर शिक्षक की सैलरी और पदोन्नति होती है। अगर ग्रेडिंग कम मिले तो वेतन और भत्तों में कटौती कर दी जाती है। भारत में अभी यह लागू नहीं हुआ है। उन्होंने अमेरिका में किए गए अध्ययन के अनुसार बताया कि वहां शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ ही व्यक्ति की आय का स्तर भी बढ़ता है, लेकिन यह भी हमारे देश में नहीं है। उन्होंने तकनीकी ज्ञान को समय की जरूरत बताया। कहा, लोग सफलता का श्रेय ज्यादातर पारिवारिक माहौल को देते हैं जबकि शोध से पता चला है कि सात फीसदी सफलता परिवार की ओर से जबकि 93 प्रतिशत कर्म से मिलती है। मेधावियों को लक्ष्य साधकर कठिन श्रम करने का सुझाव दिया। कहा, डिग्री सिर्फ सीढ़ी है, सफलता मानवता का विकास करने वालों को ही मिलती है।
मेधावी बेटियों ने साबित की सार्थकता
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री नीलिमा कटियार ने कहा कि स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में बेटियों की संख्या अधिक होना ‘बेटी बचाओ-बेटी पढाओ’ अभियान की सार्थकता सिद्ध करती है। कहा, दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं बल्कि पड़ाव है। कहा, नई शिक्षा नीति महिला शिक्षा, सशक्तीकरण, युवा शक्ति को एकजुट करने और लचीलापन लाने की पहल को देखते हुए तैयार की गई है। सरकार उच्च शिक्षा में नवाचार के लिए काम कर रही है। शोध की गुणवत्ता बढ़ाकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करने वाली पीढ़ी तैयार करने का लक्ष्य है। यह नीति बौद्धिक विकास के साथ उत्तम चरित्र का भी निर्माण करेगी। मेधावी और उपाधि धारकों से कहा, लंबे समय तक परिश्रम एवं प्रतिभा का उपयोग कर जो ज्ञानार्जन किया है, उसका सामाजिक बदलाव के लिए सदुपयोग करें।