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रेलवे की चूक: लखीमपुर स्टेशन पर लिखवा दिया गोला गोकर्ण नाथ मंदिर

Tue, 12 Mar 2019 09:16 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
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गोला गोकर्ण नाथ मंदिर
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आमान परिवर्तन के दौरान रेल विभाग ने बड़ी चूक कर दी है। दरअसल हुआ यूं कि लखीमपुर स्टेशन के निकास गेट की बिल्डिंग पर गोला गोकर्णनाथ का मंदिर लिखवाते हुए चित्र बनवाया गया है। खास बात यह है कि मंदिर की जो तस्वीर बनाई गई है, वह असल ऐतिहासिक शिव मंदिर की नहीं है। बता दें गोला गोकर्णनाथ लखीमपुर खीरी से तकरीबन 35 किलोमीटर दूर स्थित है। इसलिए यह चित्र चर्चा का केन्द्र बना है।

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रेलवे अपने प्लेटफार्म पर ऐतिहासिक महत्व की इमारतों, धार्मिक स्थलों और राष्ट्रीय स्तर के लोगों को महत्व देती है। यही वजह है कि प्लेटफार्म पर नजदीक के ऐसे स्थलों का इतिहास और दूरी भी लिखी जाती है। इसी के तहत लखीमपुर रेलवे स्टेशन के भवन पर भी यह चित्रकारी की जा रही है, लेकिन इस पर लखीमपुर शहर के ऐतिहासिक अथवा धार्मिक स्थल गोला गोकर्णनाथ मंदिर की चित्रकारी के बजाय किसी ओर मंदिर की चित्रकारी कर दी गई जिसके चलते यह तस्वीर चर्चा का केन्द्र बन गई है। 

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला महामंत्री शरद मेहरोत्रा, व्यापारी नेता उमेश शुक्ला और अरुण अवस्थी ने कहा है कि लखीमपुर स्टेशन पर शहर के धार्मिक स्थल का जिक्र होना चाहिए था। शहर में मां संकटा देवी मंदिर, बाबा भुईफोरवानाथ मंदिर और कुछ दूर स्थित लिलौटी नाथ मंदिर है, लेकिन इन मंदिरों को भूलकर 35 किलोमीटर दूर स्थित गोला के ऐतिहासिक शिव मंदिर को छोड़कर किसी अन्य मंदिर का चित्र लगाना समझ से परे है। इन नेताओं ने रेल मंत्री को पत्र भेजकर गोला गोकर्णनाथ के पौराणिक शिव मंदिर को वहां के स्टेशन पर लगवाने और इस स्थान पर स्थानीय धार्मिक स्थल का चित्र लगवाने की मांग करने की बात कही है।

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ये है गोला का पौराणिक शिव मंदिर
गोला गोकर्ण नाथ की पहचान पौराणिक शिव मंदिर से है और इसलिए गोला 'छोटी काशी' के नाम से विख्यात है। सावन माह भर में गोला में शिव भक्तों का जमावड़ा रहता है। वहीं दूर-दूर से श्रृद्घालु जलाभिषेक आदि के लिए गोला पहुंचते हैं। ऐसे में स्टेशन पर शिव मंदिर के बजाय किसी अन्य मंदिर का चित्र बनवाए जाने से लोगों में नाराजगी है।

लखीमपुर स्टेशन पर स्थानीय मंदिर का चित्र और विवरण लिखा जाना चाहिए, लेकिन 
गोला गोकर्ण नाथ मंदिर लिखवाकर शिव मंदिर के बजाय किसी अन्य मंदिर का चित्र बनवाए जाने के बारे में जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो यह गलत है, जिसे ठीक कराया जाएगा। - विजयलक्ष्मी कौशिक, मंडल रेल प्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ
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