संवाद न्यूज एजेंसी
बरेली। नवरात्र केवल उपवास और अनुष्ठान के लिए नहीं, बल्कि शक्ति, करुणा और संकल्प के जागरण का उत्सव है। नवाबगंज और रिठौरा की दो महिलाएं मानवता की सेवा के जरिये नारी शक्ति की महत्ता को चरितार्थ कर रही हैं। रिठौरा की लक्ष्मी गंगवार बेजुबानों के घाव पर ममता का मरहम लगा रही हैं तो नवाबगंज की विमला शुक्ला लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित कर रही हैं। वह देहदान भी करना चाहती हैं।
समाज के वंचित तबके की आवाज बनकर उभरीं लक्ष्मी गंगवार दो साल से बेजुबानों के घाव पर ममता का मरहम लगा रही हैं। सड़क किनारे घायल पड़े कुत्ते, बिल्ली, गाय आदि की पीड़ा लक्ष्मी के लिए एक पुकार है। अबतक वह सैकड़ों पशुओं का उपचार करा चुकी हैं। लक्ष्मी ने बताया कि कुछ लोग पालतू पशुओं भी उनके पास लेकर जाते हैं। उनका भी मुफ्त इलाज किया जाता है। समाज की बेहतर सेवा के लिए वह नीट की तैयारी कर रही हैं। इसमें पति धीरज कुमार गंगवार सहयोग कर रहे हैं। वह डॉक्टर बनकर चैरिटेबल हॉस्पिटल खोलना चाहती हैं।
नवाबगंज की विमला शुक्ला ने सास देवकी देवी के आखिरी शब्दों (मेरी आंखें किसी की दुनिया रोशन करें) को जीवन का मिशन बना लिया। विमला ने वर्ष 1982 में देवकी फाउंडेशन की स्थापना की और नेत्रदान के लिए आंदोलन शुरू किया। वह चार दशकों से लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके पति के अलावा बड़े बेटे जज पवन शुक्ला, पुत्रवधू गीतिका, छोटे बेटे अरविंद आचार्य, पूत्रवधू पूजा शुक्ला ने नेत्रदान का संकल्प लिया है। क्षेत्रवासी राम प्रकाश, शशि देवी, प्रेमा देवी गुप्ता और गांव सतुईया निवासी गुरुजीत सिंह नेत्रदान कर चुके हैं।