बरेली। शेरगढ़ का चर्चित पहाड़पुर गांव। ये वही गांव है, जहां तीन महीने पहले शोहदों के डर से लड़कियों ने स्कूल जाना छोड़ दिया था। तब सपा और भाजपा नेताओं ने नदी के दोनों ओर बसे पहाड़पुर और टांडा पर खूब राजनीति की थी। यहां शोहदों का डर अभिभावकों और लड़कियों के मन में अब भी बरकरार है। नदी पर शोेहदों के छेड़छाड़ के डर से 11 लड़कियां चार महीने से स्कूल नहीं जा रही है।
पहाड़पुर ग्राम पंचायत में पांच मजरों को मिलाकर करीब 37 सौ वोट हैं। पहाड़पुर और घाटगांव अगल-बगल में बसे हैं। चंद कदम दूर पर धौंडा (ग्रामीणों की बोली में) नदी बहती है। बरसात न होने से नदी में पानी कम है। फिर भी इतना है कि कोई पैदल नदी पार नहीं कर सकता। बरसात में जब ये नदी उफनाती है तो घाटगांव डूबने लगता है। नदी पर पुल नहीं है। ग्रामीणों के खेत नदी के पार हैं। सो लकड़ी के पटरे डाल रखे हैं। पैदल, साइकिल या बाइक निकालने पर ये पटरे हिचकोले खाते हैं तो नीचे बहती नदी की धार देखकर राहगीरों की रुह कांप जाती है। पहाड़पुर और घाटगांव की लगभग 25 लड़कियां नदी के इन पटरों पर चलकर ही शेरगढ़ में पढ़ने जाती हैं। चार महीने पहले इसी नदी के किनारे पहाड़पुर की लड़कियों से टांडा गांव के शोहदों ने छेड़छाड़ की थी। उस समय सभी लड़कियों ने स्कूल जाना छोड़ दिया था। पंचायत पहाड़पुर में अपराह्न डेढ़ बजे मतदान केंद्र के नजदीक इन लड़कियों के अभिभावक इकट्ठे हो गए। भीड़ देखकर लड़कियां भी घर से बाहर निकल आईं। पूजा, प्रिया, रोशनी, नेहा,काजल, मुस्कान, ममता, खुशी, प्रीती आदि छात्राओं का कहना था कि नदी पर हुई घटना के बाद वह चार महीने से स्कूल नहीं जा रही हैं। डर की वजह से माता पिता स्कूल नहीं भेजते। गांव में कालेज खुलने की बात सुन रहे हैं।