दूर गांवों तक माध्यमिक शिक्षा पहुंचाने के लिए स्वीकृत तीन राजकीय इंटर कालेजों का निर्माण पिछले तीन साल से पैसे के विवाद के चलते पूरा नहीं हो पा रहा है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत बनने वाले इन विद्यालयों की नई बिल्डिंग के निर्माण के लिए शासन ने कार्यदायी संस्था पैकफेड को जितना पैसा दिया, वह कम बताते हुए निर्माण कार्य रोक दिया गया। पैकफेड अब और पैसे की डिमांड कर रही है लेकिन और पैसा देने से माध्यमिक शिक्षा विभाग हाथ खड़े किए हुए है। नतीजतन, पिछले तीन साल से निर्माण रुका हुआ है।
यह तीनों विद्यालय राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में वित्तीय वर्ष 2010-11 में मंजूर हुए और तभी शासन ने प्रत्येक विद्यालय के निर्माण के लिए पैकफेड को 51 लाख 98 हजार रुपया दे दिया था। कार्यदायी संस्था ने एक साल तक आधे से ज्यादा निर्माण कराने के बाद बाकी काम के लिए 28 लाख प्रति विद्यालय की डिमांड और की। इससे माध्यमिक शिक्षा विभाग ने साफ इनकार करते हुए कह दिया कि अब शासन से पैसे मिलने का कोई प्रावधान नहीं है इसलिए एग्रीमेंट के मुताबिक जितना पैसा मिला उसमें ही निर्माण कराना पड़ेगा लेकिन पैकफेड इसके लिए तैयार नहीं हुई। उसके अफसरों ने दो टूक कह दिया कि वह अपनी जेब से तो पैसा लगाएंगे नहीं। बहरहाल, विवाद बरकरार है और जीआईसी अधूरे पड़े हुए हैं।
इंसेट...
:::कहां बन रहे विद्यालय
गांव ब्लाक
बीजामऊ नवाबगंज
बल्लिया मीरगंज
ज्योति जागीर भदपुरा
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कितना बचा है काम
तीनों विद्यालयों में दो-दो कमरों और आफिस के फर्श के अलावा टीचर्स रूम के फर्श का निर्माण। खिड़की-दरवाजे और फिनिशिंग वर्क बाकी है।
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वर्जन...
पैकफेड से 51.98 लाख रुपये की लागत से ही प्रत्येक विद्यालय के निर्माण का एग्रीमेंट हुआ था। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में लागत बढ़ाने का भी कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए पैकफेड को एग्रीमेंट का पालन करके विद्यालय का निर्माण कराकर देना चाहिए। इसमें विलंब के लिए वह जिम्मेदारी होगी।
-आशुतोष भारद्वाज, डीआईओएस
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पीडब्लूडी भी कास्ट का आकलन कर चुका है। विद्यालयों की पूरी लागत 80 लाख रुपये आ रही है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पुरानी लागत से पैसा दिया था जो खर्च हो चुका है। बाकी पैसा मिले तभी काम हो पाएगा। अब मामला शासन को भेजा गया है। पैसा मिल जाएगा तो हम काम करा देंगे।
-डीके चौधरी, एक्सईएन- पैकफेड