बरेली। जिला जेल में पहले भी आत्महत्या की कई घटनाएं हो चुकी हैं, पर अंकित की मौत इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। उसकी बैरक में मौजूद दोनों बंदी घटना के वक्त पूरे होशोहवास में थे। सीसी फुटेज ने यह चुगली कर दी। वहीं, अंकित की खराब मानसिक स्थिति को समझने के बावजूद लापरवाह जेल कर्मियों ने कपड़ा वहीं छोड़ दिया।
मेरठ जेल से बरेली जेल में इसी साल आया कैदी अंकित खराब मानसिक स्थिति से जूझ रहा था। उसे विशेष सुरक्षा कक्ष की सेल नंबर चार में रखा गया था। यहां उसके साथ बंदी विकास उर्फ विक्की व बाबू उर्फ तौकीर भी मौजूद थे। फुटेज के मुताबिक रात करीब 1.55 बजे अंकित ने सेल के गेट के कुंडे से कपड़ा बांधकर आत्महत्या करने की कोशिश की। साथी बंदियों ने आवाज लगाई तो हेड जेल वार्डर राजेंद्र सिंह व वार्डर प्रवीण चौधरी मौके पर पहुंचे। उन्होंने अंकित को समझाया और फिर चले गए। जाते वक्त वह उस कपड़े को वहीं छोड़ गए, जिससे अंकित गले में फंदा लगाने की कोशिश कर रहा था।
थोड़ी देर बाद अंकित ने दोबारा उसी कपड़े से फंदा लगा लिया। इस दौरान दोनों बंदी चुपचाप उसे देखते रहे। वह थोड़ी ही देर में मर गया। तब जेलर आनंद सिंह व डिप्टी जेलर अंजुली वर्मा ने मामले की जांच की। इस दौरान सर्वर रूम में तैनात जेल वार्डर राजेश कुमार भी दोषी पाया गया। माना जा रहा है कि वह घटनाक्रम के दौरान रूम में सो रहा था। उसने स्क्रीन पर चल रही गतिविधियों को देखा ही नहीं, वरना अंकित को बचाया जा सकता था। घटना के बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने साथी बंदियों से बात की तो, पहले उन्होंने सोने का बहाना बनाया। जब उन्हें फुटेज के बारे में बताया गया तो सफाई दी कि उन्हें लगा कि अंकित नाटक कर रहा है। ब्यूरो