बरेली। नगर निगम ने पांच महीने पहले सूखे कूड़े को छांटने के लिए दो करोड़ की लागत से 40 पोर्टा केबिन खरीदे थे, लेकिन इन्हें रखने के लिए न तो प्लेटफार्म बनवाए गए न ही बिजली का कनेक्शन हुआ है। ऐसे में केबिन निष्प्रयोज्य हैं। कई जगह तो इन्हें कचरे के ढेर के बीच रख दिया गया है। कूड़ा छंटनी किए बगैर एमआरएफ सेंटर भेजा जा रहा है।
शहर में 400-450 मीट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है। घर-घर कूड़ा लेने की व्यवस्था तो लागू है लेकिन सूखे कूड़े को छांटकर मैटेरियल रिकवरी सेेंटर (एमआरएफ) तक भेजने की व्यवस्था पर अमल नहीं हो पा रहा है। पोर्टा केबिन का संचालन करके बीस प्रतिशत सूखे कूड़े को छांटने की व्यवस्था लागू होनी है।
केबिन को अलग-अलग 40 वार्डों में रखा गया है। बेस (प्लेटफार्म) व बिजली कनेक्शन में देरी से योजना चालू होने से पहले ही झटका खा गई।
यह होना था उपयोग
शहर में जितना भी सूखा कूड़ा निकलेगा उसे केबिन के अंदर छांटा जाएगा। फिर इसे एमआरएफ सेंटर भेजा जाएगा। सेंटर संचालित करने की जिम्मेदारी एमआरएफ सेंटर चलाने वालों की है। सेंटर वालों के पास स्टाफ की व्यवस्था है।
क्या कहते हैं लोग
मेरे वार्ड में कांशीराम आवास के निकट नगरिया परीक्षित में पोर्टा केबिन का स्थान सही नहीं है। इसे रखने से पहले स्थान को लेकर कोई सुझाव नहीं किया गया। पर्यावरण अभियंता से स्थान बदलने का आग्रह किया है। - महेश राजपूत, पार्षद
अटल सेतु के नीचे सिटी सब्जी मंडी की ओर पोर्टा केबिन ऐसी जगह रखा गया है, जिससे यातायात में बाधा पड़ रही है। आस-पास के लोग परेशान हो रहे हैं। - राजू मिश्रा, पूर्व पार्षद
बेस तैयार करने के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर दिया है। इसमें करीब एक महीने का समय लगेगा। - राजीव कुमार राठी, पर्यावरण अभियंता
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