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Bareilly News: कागजों पर खेल... मैदान पर ढेर

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बरेली। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से शैक्षणिक सत्र 2024-25 से खेल कैलेंडर में शामिल किए गए नौ नए खेल कागजों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। एक साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बावजूद इन नए खेलों को सिखाने के लिए शहर में एक भी प्रशिक्षक की नियुक्ति नहीं की जा सकी है। यह बड़ी चुनौती है, क्योंकि योग्य प्रशिक्षकों के बिना विद्यार्थी इन खेलों में महारथ नहीं हासिल कर पा रहे हैं।
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माध्यमिक शिक्षा विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विविधता का अहसास कराकर उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों से जोड़ना है। सेपकटाकरा और कुराश जैसे खेलों को भी इसमें जगह दी गई है। इनमें भारत ने एशियाड में पदक भी जीते हैं। यह पहल सराहनीय है, लेकिन कोच के अभाव में इसकी सफलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला पहले से ही खेल प्रशिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। जिले के वित्तपोषित स्कूलों में सिर्फ 23 पुरुष और तीन महिला कोच ही तैनात हैं। जीआईसी में दो और जीजीआईसी में तीन प्रशिक्षकों की तैनाती है। ऐसे में नए खेलों को बढ़ावा देने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा।
ये खेल किए गए थे शामिल
माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से सेपकटाकरा, गतका, कलारीपयट्टू, कुराश, मलखंब, वुशु, शतरंज, योगासन और थांग-ता मार्शल आर्ट को कैलेंडर में शामिल किया गया है। ये खेल सिर्फ भारत के अलग-अलग हिस्सों से ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों से भी लाए गए हैं। कलारीपयट्टू केरल की एक प्राचीन युद्ध कला है, जबकि थांग-ता मणिपुर का मार्शल आर्ट है। कुराश उज्बेकिस्तान का पारंपरिक खेल है। अंडर-14, 17, 19 बालक और बालिका वर्ग में जिला व राज्य स्तर पर इन खेलों का आयोजन किया जाएगा। संवाद
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विभाग की ओर से कैलेंडर में नए खेल जोड़े तो गए हैं, लेकिन अभी यह तीन साल के लिए ट्रायल पर चलाए जा रहे हैं। - नईम अहमद, मंडलीय क्रीड़ा सचिव
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