10 के बजाय 50 रुपये के मुनाफे के चक्कर में व्यापारी का जोर नेपाली तेल पर
अफसरों को भी नहीं पता, इस तेल का इस्तेमाल सेहत के लिए कितना दुरुस्त
बरेली। नेपाल के जिस खाद्य तेल पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाया जा चुका है, वही तेल श्यामगंज मंडी के तमाम गोदामों में भरा हुआ है। रिफाइंड जैसे दिखने वाले इस तेल पर मिलावटखोर 50 रुपये लीटर तक का मुनाफा कमा रहे हैं, बगैर इस बात की परवाह किए कि यह तेल अपने खाने-पीने में इस्तेमाल करने से आम पब्लिक की सेहत पर क्या असर पड़ रहा है। शहर की तेल मंडी में नेपाली तेल की आमद कई महीने पहले होना बताई जा रही है। बुधवार को एफएसडीए के छापों में दो अलग-अलग गोदामों से बड़े पैमाने पर इस तेल की बरामदगी होने के बाद वाणिज्य कर विभाग ने भी इस अवैध कारोबार पर नजरें जमा दी हैं, जिससे व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
नेपाल के इस तेल के आयात पर प्रतिबंध है लिहाजा यह भी जाहिर है कि इस तेल को पड़ोस के पीलीभीत और लखीमपुर खीरी जिलों में नेपाल की सीमाओं तस्करी करके बरेली मंगाया जा रहा है। एफएसडीए के छापे से यह भी साफ हुआ है कि नियम-कायदों के तहत जिस तरह इस तेल के साथ सक्षम लैब का प्रमाण पत्र होना चाहिए, वह भी नहीं है। विदेश में बनी किसी भी खाद्य वस्तु के साथ यह प्रमाणपत्र होना अनिवार्य होता है। ऐसे में साफ है कि बगैर स्थानीय स्तर पर परीक्षण कराए इस बात का कोई आंकलन नहीं किया जा सकता कि यह तेल स्वास्थ्य के लिए ठीक है या नहीं, फिर भी इसे रिफाइंड ऑयल के तौर पर धड़ल्ले से शहर में बेचा जा रहा है।
बाजार से जुड़े सूत्र यह भी बता रहे हैं कि अब तक अरबों रुपये कीमत का यह तेल शहर में खप चुका है। बताया जाता है कि नेपाली तेल का एक टिन करीब 12 सौ रुपये का पड़ता है और आम रिफाइंड के रेट में बेचने पर फुटकर व्यापारियों को एक लीटर पर करीब 50 रुपये तक का मुनाफा होता है जबकि देसी रिफाइंड ऑयल पर बमुश्किल दस रुपये ही बचते हैं। यही वजह है कि श्यामगंज मंडी के कई गोदामों में प्रतिबिंधित होने के बावजूद यह तेल भरा हुआ है। एफएसडीए के छापे में नीलकमल और महालक्ष्मी ब्रांड का तेल पकड़ा गया था लेकिन कुछ व्यापारियों का कहना है कि इसके अलावा राजहंस और दूसरे कई ब्रांड का नेपाली तेल भी गोदामों भरा हुआ है।
पहली बार बरेली में पकड़ा गया नेपाली तेल
एफएसडीए के छापे से यह भी खुलासा हुआ कि श्यामगंज बाजार में नेपाली तेल का कारोबार करीब एक साल से चल रहा है लेकिन फिर भी इसकी भनक संबंधित विभागों को नहीं थी। ज्यादातर मध्यम और निर्माता फर्म लाइसेंस की शर्तों के खिलाफ जाकर नेपाली तेल का कारोबार कर रही हैं। छापे में बरामद स्टाक और दिखाए गए बिलों में भी काफी अंतर मिला है है। पहली बार विदेशी तेल का कारोबार पकड़ में आने के बाद तेल व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि करोड़ों रुपये का अवैध स्टाक अब क्लियर करना मुश्किल हो गया है।
बाजार में बिगड़ा संतुलन
नेपाल से रिफाइंड और पामऑयल भारत आता रहा है। केंद्र सरकार ने आठ जनवरी से नेपाल और बांग्लादेश से रिफाइंड और पामऑयल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन इसके बाद मुनाफाखोरों ने रिफाइंड की नेपाल से तस्करी शुरू करा दी। अपेक्षाकृत काफी कम कीमत में नेपाल का तेल बाजार में आने से घरेलू तौर पर उत्पादित तेल के कारोबार को काफी हद तक पीछे धकेल दिया है। सूत्रों के मुताबिक सिर्फ श्यामगंज ही नहीं, जिले में और भी जगह नेपाली तेल का अच्छा-खासा स्टाक है। बरेली के व्यापारी रक्सौल के जरिये भी नेपाली तेल मंगा रहे हैं।
टैक्स की चोरी पर वाणिज्य कर विभाग सक्रिय
नेपाली तेल के अवैध कारोबार का खुलासा होने के बाद वाणिज्य कर विभाग भी जाग गया है। विभागीय अफसरों का कहना है कि एफएसडीए की कार्रवाई पूरी होने के बाद वे संबंधित कारोबारियों से पूछताछ कर उनके रिकॉर्ड तलब करेंगे। अफसरों ने बताया कि एक बिल पर कई बार माल आने और दूसरे किस्म की हेराफेरी भी इस कारोबार में संभव है इसलिए प्रवर्तन टीम भी कार्रवाई करेगी।