फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: मिट्टी से मैट तक खिलाड़ियों को कसौटी पर कस रहे कोच

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। शहर के पहलवानों को मिट्टी से मैट तक का सफर तय कराने वाले प्रशिक्षक खिलाड़ियों को हर कसौटी पर कस रहे हैं। जिन्हें तैयार करने के लिए खिलाड़ियों के साथ स्वयं भी पसीना बहा रहे हैं। खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, रहना, खाना, पीना आदि सभी आवश्यकताओं को अखाड़े में निशुल्क पूरा कराया जा रहा है।
विज्ञापन

शहर में तीन अखाड़े हैं, इसके अलावा दो जगह मैट पर कुश्ती अभ्यास कराया जा रहा है। प्रशिक्षकों का कहना है कि कुश्ती में पहले खिलाड़ी को मिट्टी पर कसा जाता है, इसके बाद मैट पर प्रशिक्षण दिया जाता है। मिट्टी में केवल ताकत और मैट पर तकनीक से खेल पलटते देर नहीं लगती है। जाट रेजिमेंट से इस वर्ष दो खिलाड़ी नाम रौशन कर लौटे हैं। इसमें आदित्य गुप्ता बीते दिनों ग्रीस वर्ल्ड कुश्ती ग्रीको रोमन में मेडल जीतकर लौटे हैं। इसी तरह विनय तोमर भी खेले इंडिया में गोल्ड जीत चुके हैं।

जाट सेंटर में बीते कई वर्षों से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने वाले कोच व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे केके यादव भी इन दिनों खिलाड़ियों का खूब पसीना निकलवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुश्ती में एशियन गेम्स-2014 में पांचवें स्थान पर रहा। इसके बाद ललक थी कि कई खिलाड़ी खड़े करूंगा। पहले मिट्टी फिर मैट पर दांव-पेच सिखाते हैं। कड़ी मेहनत के बाद ही खिलाड़ी में अनुशासन आता है। अनुशासन, डायट और ट्रेनिंग तीन ही कुश्ती के मुख्य अंग हैं। संवाद
विज्ञापन


कुश्ती में ताकत के साथ तकनीकी भी जरूरी

- सीबीगंज में श्रीराम अखाड़ा संचालक मनोज शर्मा ने बताया कि इस समय मेरी उम्र 54 वर्ष है। जीवन कुश्ती को समर्पित रहा है। इसलिए कुश्ती की शुरुआत ही मिट्टी से कराई जाती है, जिससे उसकी बुनियाद पुख्ता हो। इसके बाद खिलाड़ी में अनुशासन आता है, ताकत बढ़ती है जिसके बाद ही उसे मैट पर सिखाया जाता है। कुश्ती में जितनी आवश्यक ताकत है उतनी तकनीक भी जरूरी है। जिसे मैट पर ही सिखाया जा सकता है।
-
कुश्ती केवल खेल नहीं बल्कि साधना है

- जिला कुश्ती संघ के सचिव योगेंद्र यादव ने बताया कि जितने भी अखाड़े हैं, वह पहलवानों को निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं। कुश्ती केवल खेल नहीं एक साधना भी है, जिसे अनुशासन व ट्रेनिंग से खिलाड़ी पूरा करता है। वहीं, आधुनिकता के लिए मैट पर भी अभ्यास कराया जा रहा है। एसोसिएशन की ओर से फरीदपुर व विश्वविद्यालय में भी ट्रेनिंग दी जा रही है। जिसके परिणाम भी खिलाड़ियों के चयन के रूप में दिख रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें