बरेली। रोडवेज बसों की मरम्मत में घपला करने के आरोप में बरेली, रुहेलखंड और पीलीभीत डिपो के एआरएम समेत सीनियर फोरमैन व लेखाकार दोषी पाए गए हैं। शासन स्तर से गठित कमेटी ने जांच पूरी कर ली है। सत्यापन के बिना बिलों का भुगतान करने के मामले में बरेली डिपो के सहायक लेखाकर और सेवा प्रबंधक भी प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। इन अधिकारियों पर कार्रवाई तय है।
बरेली, रुहेलखंड व पीलीभीत डिपो की रोडवेज बसों की मरम्मत की जिम्मेदारी निजी फर्म की है। नवंबर 2024 में सामने आया था कि फर्जी बिलों के सहारे फर्म को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। कई ऐसी बसों की मरम्मत के बिल भी पास कर दिए गए जो दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण थानों में खड़ी थीं। बसों में मरम्मत के ऐसे काम दिखाए गए जो होते ही नहीं हैं। फर्जी बिलों का भुगतान होता रहा और अधिकारी चिट्ठी-चिट्ठी खेलते रहे।
अमर उजाला ने उठाया था मामला
अमर उजाला ने गड़बड़झाले का मामला प्रमुखता से उठाया ताे परिवहन आयुक्त के साथ शासन ने भी संज्ञान लिया। छह दिसंबर 2024 को प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने जांच का आदेश दिया था। अब जांच पूरी हो गई है।
ये पाए गए दोषी
एआरएम बरेली डिपो संजीव श्रीवास्तव, एआरएम रुहेलखंड डिपो अरुण कुमार वाजपेयी, एआरएम पीलीभीत पवन कुमार श्रीवास्तव, बरेली डिपो के सीनियर फोरमैन दीपक जैन, रुहेलखंड डिपो के सीनियर फोरमैन दिनेश सिंह, पीलीभीत के सीनियर फोरमैन जुबैर दोषी पाए गए हैं। लेखाकार ओमपाल सिंह, राजेश जायसवाल, मेवाराम गंगवार और बरेली डिपो के सहायक लेखाकार संतोष कुमार, सेवा प्रबंधक धनजी राम भी वित्तीय अनियमितताओं के दोषी पाए गए हैं। संवाद
मामले की जांच पूरी हो चुकी है। वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं हैं। अभी मैं ट्रेन में हूं। इस मामले में ज्यादा नहीं बता सकता। - सत्य नारायण, जीएम तकनीकी व नोडल अधिकारी बरेली परिक्षेत्र