आरबीआई कानपुर के जनरल मैनेजर पीके गर्ग ने कहा कि कोई भी कंपनी किसी को रातोंरात मालदार नहीं बना सकती है। फ्राड कंपनियों के बचने का यही तरीका है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक किया जाए। आम आदमी के जागरूक होने पर भी साइबर क्राइम की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। देश की मुद्रा को बचाने के लिए नकली नोटों की पहचान भी जरूरी है।
पुलिस लाइंस के सभागार में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि लालच बुरी बला है। लोग मोबाइल के जरिए बिना जान पहचान के लालच में आकर अपनी पूंजी गंवा बैठते हैं। अपने एटीएम का नंबर बताकर नुकसान उठा लेते हैं। ठगों के जाल में पढ़े लिखे लोग भी फंस रहे हैं। नौकरी के नाम पर भी कंपनी बनाकर ठगी करने वाले बहुत हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। फर्जी ईमेल आईडी बनाकर धोखेबाज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी तक बन जाते हैं। उन्होंने चेताया कि आरबीआई किसी का व्यक्तिगत खाता नहीं खोलता है। बैंक ने किसी भी अधिकारी को धन वितरण के लिए अधिकृत नहीं किया है। नकली नोटों की पहचान के सबसे पहले उनका नंबर देख लें। आपके पास असली नोट हो तो मिलान कर लें। नकली नोट का नंबर अक्सर छोटा होता है। असली नोट के कागज की क्वालिटी अच्छी होती है। उसका कागज छूने से करर...बोलता है। रोशनी में देखने पर नोट में आरबीआई और भारत लिखा होता है। डीआईजी आरकेएस राठौर ने भी विचार रखे। इस मौके पर एसपी देहात बृजेश श्रीवास्तव, एसपी ट्रैफिक ओपी यादव, एसपी क्राइम एसपी सिंह आदि मौजूद रहे।