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करोड़ों गंवाने का गुस्सा.. बैठक छोड़ नारेबाजी करते हुए कोतवाली पहुंचे सैकड़ों निवेशक

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बरेली। सैकड़ों निवेशकों के करोड़ों रुपये लेकर भागी डेवलपर्स कंपनी के हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त रिसीवर भी रकम वापस कराने का भरोसा नहीं दिला पाए तो निवेशक बुरी तरह भड़क गए। रिसीवर की ओर से बुलाई गई बैठक छोड़कर उन्होंने जमकर हंगामा किया और नारेबाजी करते हुए गांधी उद्यान से कोतवाली पहुंच गए। उनका कहना था कि एक-एक निवेशक से 35 से 40 लाख तक की ठगी की गई है, कंपनी के अफसरों को तत्काल गिरफ्तार कर उनका पैसा दिलाया जाए। चूंकि यह मामला पहले ही थाना बारादरी में दर्ज था इसलिए कोतवाली से निवेशकों को बारादरी भेज दिया गया।
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गांधी उद्यान के पास स्थित एक होटल में बुधवार सुबह डायमंड इन्फ्रा लैंड डेवलपर्स इंडिया लिमिटेड के निवेशकों/एजेंटों की बैठक बुलाई गई थी। निवेशकों को बैठकी की सूचना हाईकोर्ट से नियुक्त रिसीवर लखनऊ के राजाजीपुरम निवासी अमित तिवारी और उनके साथी नवीन अग्रवाल ने ई-मेल के माध्यम से दी थी। बैठक में पहुंचे बदायूं समेत कई जिलों के निवेशक रिसीवर की बात से संतुष्ट नहीं हुए और होटल से बाहर आकर सड़क पर हंगामा करने लगे। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस रिसीवर और उसके साथी को कोतवाली ले आई। पीछे से करीब 150 निवेशक भी गांधी उद्यान से कोतवाली परिसर तक नारेबाजी करते हुए पहुंच गए। निवेशकों ने कोतवाली में भी जमकर नारेबाजी की।
पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत किया जिसके बाद रिसीवर ने बताया कि निवेशकों से संपर्क कर गजट के माध्यम से मीटिंग तय की गई थी। पूछताछ में सामने आया कि निवेशकों में एक दयानंद ने पिछले साल कंपनी के महानगर निवासी प्रबंधक एनपी गंगवार, डायरेक्टर रंजना गंगवार, रनवीर सिंह, सुमित कुमार और पूजा गंगवार के खिलाफ बारादरी थाने में करीब डेढ़ लाख रुपये हड़पने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इंस्पेक्टर गीतेश कपिल ने बताया कि कंपनी के फ्रॉड का मामला पहले से बारादरी थाने में दर्ज है। मामले की विवेचना कर रहे एसआई को बुलाकर जानकारी ली गई। इसके बाद निवेशकों को बारादरी थाने जाने को कह दिया गया।
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60 के 90 हजार या 300 वर्गगज जमीन देने का देते थे झांसा
कोतवाली में इकट्ठे हुए निवेशकों ने बताया की कंपनी में एजेंट बनाकर उनके माध्यम से निवेशकों का पैसा आईडी और एफडी में जमा कराया जाता था। उनमें से किसी ने 35 लाख तो किसी ने 43 लाख रुपये फंसे होने की बात कही। बताया कि कंपनी दो साल तक किश्त जमा करने पर 60 हजार के 90 हजार रुपये देने या फिर 300 वर्गगज का प्लॉट देने का दावा करती थी। करोड़ों रुपये जमा होने पर कंपनी ने अपनी सारी प्रॉपर्टी बेच दी और खुद को दिवालिया घोषित करा दिया।
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