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पर्यावरणविदों के मुताबिक, प्रदूषण बढ़ने से पर्यावरण में दिखेंगे घातक परिवर्तन

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बरेली। प्रदूषण के मामले में देश के टॉप टेन शहरों की सूची में शुमार हो चुके बरेली शहर में अगर समय रहते रोकथाम के ठोस प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले सालों में इसके घातक परिणाम सामने आएंगे। बीमारियों का ग्राफ बढ़ने के साथ ही, पर्यावरण भी प्रभावित होगा। इससे प्राकृतिक आपदा भी आ सकती है। यह आशंका पर्यावरणविदों ने जाहिर की है। उनके मुताबिक प्रदूषण के बढ़ने का सीधा अर्थ प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग के साथ उनकी भरपाई के लिए कोई ठोस पहल न होना है। यहां अफसर चादर ताने सो रहे हैं, जबकि दिनोदिन बढ़ रहा प्रदूषण प्राकृतिक आपदा के संकेत दे रहा है।
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पर्यावरणविद् बरेली कॉलेज के एमीरेट्स प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना के मुताबिक वायु प्रदूषण का ग्राफ बढ़ने का अर्थ है कि उत्सर्जित हो रही प्रदूषित वायु के सापेक्ष या उससे अधिक शुद्धता का अभाव। ग्रीन लैंड की कमी होने के साथ ही प्रदूषित वायु को अवशोषित करने के लिए पेड़ों की भी कमी है। लिहाजा शहर में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। एनजीटी की गाइडलाइन के मुताबिक प्रत्येक जिले में 30 फीसदी ग्रीनलैंड होनी चाहिए, लेकिन बरेली में ग्रीनलैंड बेहद कम है। ऐसे में पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होना शुरू हो गया है। शहर में घने बादल छाने के बाद भी खंडवर्षा होना इसका स्पष्ट संकेत है। आशंका जताई कि आने वाले दिनों में अगर यही स्थिति रही तो प्रदूषण पारिस्थितिकी तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करेगा। बारिश असामान्य होगी। इससे शहरी क्षेत्र में भूजल स्तर गिरेगा या फिर बाढ़ की स्थिति पैदा होगी। इसके अलावा प्रदूषण से जीव-जंतु और मनुष्य सभी बुरी तरह प्रभावित होंगे। लोग महामारी की चपेट में भी आ सकते हैं।

बरेली में नहीं होती प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनीटरिंग
देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहर की सूची में दर्ज बरेली में अब तक प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनीटरिंग शुरू नहीं हो सकी है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी रोहित सिंह सचान ने बताया ऑनलाइन मॉनीटरिंग के यंत्र लगाने के लिए पूर्व में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है लेकिन अब तक पहल शुरू नहीं हो सकी है। बरेली में प्रभा सिनेमा के पास और आईवीआरआई में वायु प्रदूषण मापक यंत्र लगे हैं। इसके प्रत्येक दो दिन में एक बार प्रदूषण का स्तर मापा जाता है।
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ग्रीन लैंड बढ़ाने की हो रही कवायद
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रोहित सिंह सचान के मुताबिक प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है, इस पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक माह डीएम और कमिश्नर की अध्यक्षता में बैठकें हो रही हैं। पिछले दिनों हुई बैठक में एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार बरेली में ग्रीनलैंड का दायरा बढ़ाने का एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत सड़कों के किनारे और खाली पड़े मैदानों, तालाबों, नदी के किनारों पर पौधरोपण कराने समेत लोगों को भी अपने घरों में फूल के पौधोें के अतिरिक्त वृक्ष लगाने को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न विभागों से भी सहयोग मांगा गया है। बताया कि हाल ही में पूर्व नगर आयुक्त ने सॉलिड वेस्ट प्लांट के लिए सतारपुर में जमीन देखी है। उसकी खरीद प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा कूड़ा निस्तारण के लिए भी ठोस प्रयास किए जाने की संस्तुति की गई है।
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