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सेना भर्ती में सेंध- री-मेडिकल मतलब हर आपत्ति के 50 हजार

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बरेली। शनिवार को मिलिट्री हॉस्पिटल के पास से दबोचे गए अभ्यर्थी से पूछताछ में बरेली और आगरा के फौजियों के नाम सामने आने के बाद सेना में खलबली मची हुई है। रविवार को सैन्य अफसर और मिलिट्री पुलिस अभ्यर्थी से पूछताछ करते रहे लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग सका। मगर इस दौरान यह सामने आया कि दोबारा मेडिकल के दौरान हर आपत्ति हटाने के लिए 50 हजार रुपये तक वसूले जाते थे।
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शनिवार को पकड़े गए बदायूं में थाना बिसौली के आसफपुर निवासी युवक ने बताया कि उसके साथ ही मेडिकल फिटनेस में कई अन्य अभ्यर्थियों को भी अनफिट बताकर री-मेडिकल (दोबारा मेडिकल) के लिए भेजा था। इसी दौरान उनका संपर्क आगरा निवासी एमएच में कार्यरत फौजी से हुआ। फौजी ने री-मेडिकल के दौरान हर आपत्ति दूर कराने के लिए 30-50 हजार रुपये की मांग की थी। कुछ ने रुपये देने पर हामी भी भर दी थी। अभ्यर्थी अलग-अलग जिलों से थे। उनसे लगातार संपर्क न होने से यह पता नहीं कि उन्होंने रुपये दिए या नहीं। रविवार को मिलिट्री पुलिस ने पूछताछ के बाद युवक को कैंट पुलिस को सौंप दिया है। अभ्यर्थी से मिली जानकारी के आधार पर फौजियों और सेना भर्ती के अन्य दलालों की तलाश शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि एमएच के डॉक्टरों की भी गुपचुप निगरानी कराई जा रही है।
फौजी के झांसे में आसानी से आ जाते हैं युवा
सैन्य सूत्रों के मुताबिक सेना भर्ती में दलाली को रोकने के लिए चल रहे प्रयासों से इसमें कमी आई है। मगर अब कुछ मौजूदा और पूर्व फौजी भी अभ्यर्थियों को झांसा देकर ठगी कर रहे हैं। सेना से जुड़े होने का उन्हें फायदा मिलता है। जैसे ही यह लोग अफसरों में अपनी पैठ बताकर भर्ती कराने की गारंटी देता है तो युवा इनके चंगुल में फंस जाते हैं।
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50 हजार से पांच लाख तक में भर्ती का झांसा
सूत्रों का कहना है कि सेना भर्ती में री-मेडिकल के लिए दलाल प्रत्येक आपत्ति पर 30-50 हजार रुपये तक वसूलते हैं। वहीं पूरी भर्ती प्रक्रिया के नाम पर पांच लाख रुपये तक में सौदा होता है। पिछले दिनों उत्तराखंड के बनबसा में भी एक ऐसा ही फर्जीवाड़ा सामने आया था। इसमें सात युवकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिये सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर उनसे पांच-पांच लाख रुपये की वसूली क ी गई थी। लेकिन मामला पकड़े जाने पर सभी पर मुकदमा दर्ज कराया गया।
सबसे ज्यादा फर्जी मामले वाले जिले
सैन्य सूत्रों के मुताबिक अब तक पकड़े गए फर्जीवाड़ा में सबसे ज्यादा अभ्यर्थी बुलंदशहर, गाजियाबाद, फतेहपुर, झांसी, शाहजहांपुर, सहारनपुर, अलीगढ़ और मेरठ के हैं। ये शैक्षिक और निवास प्रमाण पत्र तक फर्जी बनवा लेते हैं। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान यहां के तमाम मामले पकड़ में आए हैं। संभावना जताई जा रही है कि पूर्व में हुई भर्तियों में भी क ई अभ्यर्थी फर्जी दस्तावेजों के जरिए भर्ती हुए हैं, जिनकी तलाश जारी है।
पिछले वर्षों में हुए फर्जीवाड़ा में भी
सामने आ चुके हैं फौजियों के नाम
- साल 2016 में भर्ती के नाम पर ठगने वाले गिरोह के चार लोगों को मिलिट्री इंटेलीजेंस ने रुपये का लेनदेन करते हुए दलाल समेत पकड़ा था। मगर गैंग का मास्टर माइंड फ रार हो गया था। जांच में एमईएस के कर्मी से सेना भर्ती के अहम दस्तावेज भी बरामद हुए थे। उस समय सुनील ने विजय कुमार निवासी गंगानगर, सुभाषनगर को गैंग लीडर बताया। टीम ने विजय की तलाश में छापेमारी की। मगर वह हाथ नहीं लग सका।
- बरेली में सेना भर्ती के लिए हापुड़ में भी ठगी की गई थी। सैन्य वर्दीधारी युवक ने मेरठ और अलीगढ़ के पांच युवाओं से हापुड़ में सौदा तय करने के बाद बरेली में उनसे 15 लाख रुपए वसूले। इसके बाद आरोपी गायब हो गया। ठगी के शिकार होने वालों में अलीगढ़ के हामिदपुर निवासी मनोज, बृजपाल, संजू, गौरव और मेरठ में गांव रोही निवासी नकुल थे।
- हापुड़ भर्ती के दौरान सौदा करके बरेली में रुपये हड़पने वाला मेरठ निवासी युवक सुमित कुमार नायक है। इसने युवाओं को भर्ती का प्रलोभन देकर कई लाख रुपये ठगे थे।
- सेना में फर्जी प्रमाण पत्रों से भर्ती कराने के मामलों का मास्टरमाइंड मेरठ निवासी आदेश गुर्जर है। वह बरेली के एक होटल में लोगों से डील करता था। सेना से रिटायर सूबेदार मेजर आदित्य चौहान के साथ ही उसके गैंग में अन्य लोग भी हैं। इसका खुलासा प्रमाणपत्रों के ऑनलाइन सत्यापन के दौरान हुआ था।
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