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यूनिवर्सिटी ने नहीं रखा पक्ष, बैंक ने दिया गोलमोल जवाब

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विश्वविद्यालय की जमीन का प्रकरण

संबंधित पक्षों के जवाब न देेने जांच हो रही प्र्रभावित

बरेली। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी की जमीन के एक हिस्से को जालसाजी कर सात खातेदारों के अपने नाम दर्ज कराने के मामले की जांच में अड़ंगा लग गया है। इस प्रकरण की जांच कर रहे तहसीलदार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक अपना जवाब नहीं दिया है। उधर, इस जमीन पर कर्ज देने वाली बैंक की ओर से भी गोलमोल जवाब भेजा गया है। बैंक अधिकारियों ने यह तक नहीं बताया कि जमीन पर कितना लोन दिया गया। इससे मामले की जांच प्रभावित हो रही है।
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यूनिवर्सिटी की हरूनगला स्थित जमीन पर कब्जा कर सात लोगों ने राजस्व कर्मियों से सांठगांठ कर उसकी मिल्कियत अपने नाम दर्ज करा ली। फिर फर्जी कागजों से बैंक से इस जमीन पर लोन ले लिया। इस प्रकरण की जांच में सदर तहसीलदार को पता चला कि खसरा नंबर-32 पर करीब दो बीघा जमीन 1377-1379 फसली के खाता नंबर 158 पर खातेदार बिहारी और उनके दो बेटों के नाम दर्ज थी। इसके बाद यह जमीन रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के नाम दर्ज हो गई। हाल ही में जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई कि जिस जमीन को यूनिवर्सिटी के लिए अधिग्रहीत किया गया था, उसे अब कुछ और लोगों ने अपने नाम दर्ज कराकर उस पर कब्जा भी कर लिया है। साथ ही इस जमीन पर बैंक लोन भी स्वीकृत करा लिया गया है। इस मामले में तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने विश्वविद्यालय प्रशासन को हफ्ताभर पहले अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस दिया था, लेकिन विश्वविद्यालय ने अब तक अपनी स्थिति साफ नहीं की है। जांच अधिकारी का कहना है कि विश्वविद्यालय से जमीन संबंधी दस्तावेज और मुआवजा का रिकार्ड न मिल पाने से कई महत्वपूर्ण तथ्य नहीं मिल पा रहे हैं। इधर, इस जमीन पर कर्ज देने वाली बैंक ने भी गोलमोल जवाब दिए हैं। बैंक अफसरों का कहना है कि उन्होंने वकीलों की रिपोर्ट पर फाइल पास की थी, जबकि वकीलों का कहना है कि राजस्व रिकार्ड के आधार पर उन्होंने जमीन को गैरकृषि भूमि पाते हुए आख्या दी थी।

लेखपालों की टीम नहीं कर सकी पैमाइश
विवादित जमीन की मौके पर पैमाइश करने के लिए रविवार को लेखपालों की टीम भी भी गई थी लेकिन वहां आबादी सहित कई दूसरी दिक्कतों की वजह से पैमाइश नहीं की जा सकी है। लेखपालों का कहना है कि इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।
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जमीन के मामले में अभी यूनिवर्सिटी का जवाब नहीं आया है। बैंक अधिकारियों ने भी पूरी रिपोर्ट नहीं दी है। इस संबंध में फिर पत्र भेजा जा रहा है।
- आशुतोष गुप्ता, सदर तहसीलदार
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