बरेली। एक-एक कर जमीनों के घोटाले सामने आते गए लेकिन अफसरों की बेपरवाही का सिलसिला नहीं टूटा। गंभीर मामलों में भी मातहतों को बचा दिए जाने का नतीजा यह हुआ कि राजस्व विभाग का पूरा सिस्टम भूमाफिया की मुट्ठी में आ गया। अब अंदेशा जताया जा रहा है कि जिन अलमारियों में राजस्व विभाग का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड रखा जाता है, उनकी डुप्लीकेट चाबियां भी भूमाफिया के कब्जे में हैं। इसी आशंका से तहसीलदार ने सभी अलमारियों के ताले बदलने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ न्यायालयों में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।
तहसीलदार सदर के न्यायालय से गायब हुईं करोड़ों की जमीनों पर कब्जे की छह महत्वपूर्ण फाइलें एफआईआर दर्ज होने की नौबत आने के बाद एक कबाड़ी की दुकान से मिलने के बाद अफसरों को यह मामला संभालना मुश्किल पड़ रहा है। ऊपर जवाब देने के लिए इस सवाल का उत्तर तलाशा जा रहा है कि न्यायालय से ये रिकार्ड कैसे गायब हुए। यह आशंका भी जताई जा रही है कि तहसील की जिन अलमारियों में यह महत्वपूर्ण रिकार्ड रखा हुआ है, तहसील स्टाफ के जरिये उनकी डुप्लीकेट चाबियां भूमाफिया के कब्जे में हो सकती हैं। ऐसे में न्यायालय के आदेश और दूसरे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर हेराफेरी किए जाने की आशंका पैदा हो गई है।
बता दें कि इसी साल जनवरी में तत्कालीन एडीएम सिटी रहे ओपी वर्मा की जांच में नवाबगंज के गांव डंडिया नजमुल निशां में सौ बीघा जमीन के रिकार्ड को अभिलेखागार से निकालकर उसमें जालसाजी किए जाने का खुलासा हुआ था। हद यह थी कि सरकारी स्टाफ ने ही इस मामले में उप संचालक चकबंदी न्यायालय के आदेश को व्हाइटनर लगाकर बदल दिया था। ऐसे कई पुराने मामले सामने होने की वजह से अफसरों को आशंका है कि तहसील के रिकार्डों में हेराफेरी करने के लिए स्टाफ ने डुप्लीकेट चाबियां बनवाकर भूमाफिया तक तो नहीं पहुंचा दी हैं। तहसीलदार ने पेशकार को सभी ताले बदलने के निर्देश दिए है। बताया जा रहा है कि न्यायालय कक्ष में निगरानी के लिए वहां सीसीटीवी कैमरा लगाने का इंतजाम भी जल्द होगा।
अब डीएम से मजिस्ट्रियल जांच की अनुमति मांगी
फाइलें गायब होने के मामले में तहसीलदार सदर ने लिखा डीएम को पत्र
बरेली। तहसील सदर के न्यायालय से गायब हुईं छह फाइलें करगैना में कथित रूप से एक कबाड़ी की दुकान पर मिलने और एक फाइल अब भी गायब होने के मामले में तहसीलदार सदर आशुतोष गुप्ता ने मजिस्ट्रियल जांच की अनुमति मांगी है। उन्होंने इस बारे में डीएम को चिट्ठी लिखी है।
तहसीलदार सदर न्यायालय में 14 से 21 अक्तूबर के बीच जमीन संबंधी विभिन्न मुकदमों की सात फाइलें गायब मिली थीं। पेशकार के काफी ढूंढने के बावजूद तहसील के किसी भी कार्यालय में ये फाइलें नहीं मिलीं। तहसीलदार सदर की दो अक्तूबर को भेजी रिपोर्ट पर पूर्व डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने यह मामला जानकारी में आने के बाद एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दे दिया था। इसके बाद नाटकीय ढंग से तीन नवंबर को एक वकील के जरिये सूचना मिली कि छह फाइलें तहसील से करीब पांच किमी दूर करगैना पुलिस चौकी के सामने एक कबाड़ी की दुकान पर हैं। यह सूचना भी उसी बाबू को मिली जिस पर फाइल रखने की जिम्मेदारी थी। स्टाफ कबाड़ी की दुकान पर पहुंचा तो वहां सिर्फ छह फाइलें मिलीं। ग्राम सभा सफरी बनाम उस्माल अली रजा खान पत्रावली अब भी गायब है। बुधवार को तहसीलदार ने डीएम को चिट्ठी लिखकर इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराने की अनुमति मांगी है।
सवालों के घेरे में तहसील स्टाफ
तहसीलदार न्यायालय से जमीन संबंधी महत्वपूर्ण पत्रावलियों के गायब होने के मामले में तहसील स्टाफ की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सवाल यह है कि कर्मचारियों की निगरानी के बीच यह फाइलें कैसे गायब हो गईं और कबाड़ी की दुकान तक कैसे पहुंच गईं। सवाल यह भी है कि न्यायालय में की सुनवाई के दौरान ही कहीं ये पत्रावलियां गायब नहीं हुईं। ऐसे में रिकार्ड रखने की निकालने और रखते वक्त पेशकार समेत दूसरे कर्मचारियों ने इसका सही से मिलान क्यों नहीं किया?
तहरीर पर पुलिस ने नहीं दर्ज की रिपोर्ट
तहसील से पत्रावलियों के गायब होने के मामले में पेशकार विक्रम सिंह की ओर से कोतवाली पुलिस को तहरीर दी गई लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद पेशकार ने दो नवंबर को यह तहरीर स्पीड पोस्ट से भी पुलिस को भेज दी। तहसील के अधिकारियों की तरफ से इस प्रकरण की विभागीय जांच भी नहीं कराई गई है।
यह मामला अत्यंत गंभीर है। डीएम को इसकी सूचना पहले भी दी जा चुकी है। एक बार फिर डीएम को रिपोर्ट देते हुए इस प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच कराने का आग्रह किया गया है ताकि इसमें जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके। -आशुतोष गुप्ता, तहसीलदार, सदर