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साजिश या हेराफेरी! शस्त्र की दुकान का रिकॉर्ड गड़बड़, फंसे पूर्व मंत्री के रिश्तेदार

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बरेली। पूर्व मंत्री के रिश्तेदार के गन हाउस में शस्त्रों के रिकार्ड में गंभीर किस्म की गड़बड़ी पकड़ी गई है। सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में खुलासा हुआ कि आंवला के राजपूत गन हाउस पर एक लाइसेंस धारक को उसकी गन वापस कर दिए जाने के बावजूद रिकॉर्ड में उसकी तारीख दर्ज नहीं की गई जबकि ऐसे में वह गन का दुरुपयोग कर सकता था। जांच पूरी होने के बाद पूर्व मंत्री के रिश्तेदार की शस्त्र की दुकान का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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शस्त्र अधिनियम का एक मामला कमिश्नर न्यायालय में विचाराधीन है। इसकी सुनवाई के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार ने जांच की तो पता चला कि आंवला तहसील के पुरैना निवासी सत्यप्रकाश गुप्ता ने अपना शस्त्र सात जून 2012 को आंवला के राजपूत गन हाउस पर जमा किया था। यह गन हाउस एक पूर्व मंत्री के रिश्तेदार का है जिसने सत्यप्रकाश को जब शस्त्र वापस किया तो रिकार्ड में शस्त्र वापसी के कॉलम में सिर्फ उसके साइन कराए, उस पर तारीख दर्ज नहीं की। यह गड़बड़ी मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार चौंक गए। दरअसल आशंका यह थी कि शस्त्र जमा करने वाला व्यक्ति इस गड़बड़ी का लंबित मुकदमे में अनुचित फायदा उठा सकता था। सिटी मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट पर विक्रेता का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

अब सभी शस्त्र विक्रेताआें के रिकार्ड की जांच होगी
शस्त्र लाइसेंस को लेकर यह गंभीर मामला सामने आने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार ने जिले के सभी एसडीएम, एसीएम और सीओ को शस्त्र विक्रेताओं के रिकार्ड चेक करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसकी नियमित रिपोर्ट भी भेजने को कहा है।
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राजपूत गन हाउस में शस्त्र रजिस्टर पर शस्त्र वापसी की तारीख दर्ज न होना काफी गंभीर है। इसके लिए दुकानदार का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जा रही है। -मदन कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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