केतली में लगी थी गोली
दूसरे बदमाश ने जान से मारने की नीयत से गोली चलाई, तो संजय ने हाथ मारकर तमंचा साइड में कर दिया और गोली पास में रखी केतली में सुराख करते हुए निकल गई। इसका बुलट जीआरपी ने अपने कब्जे में ले लिया। आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए कंट्रोल रूम का ताला तोड़कर भाग निकले। साथ ही निजी मोबाइल फोन भी ले गए। सभी आरोपियों ने चेहरे को ढक रखा था।
वारदात को अंजाम देते समय एक बदमाश के चेहरे से कपड़ा हट गया। जिसका नाम दीमक ऊर्फ दीमका ऊर्फ नजारिक खां था। पुलिस ने इसी आरोपी के माध्यम से अन्य आरोपियों की पहचान कर ली। पुलिस ने मामले की तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली। पुलिस ने 27 नवंबर 2013 को विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए। वर्ष 2016 में दीमका की मौत हो गई।
पुलिस ने पेश किए 40 साक्ष्य
पुलिस ने सभी आरोपियों की निशानदेही पर साक्ष्यों को बरामद किया गया। न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के रूप में कुल 40 साक्ष्य प्रस्तुत किए गए और आठ गवाह पेश किए गए। न्यायालय ने साक्ष्यों का अवलोकन करने, गवाहों को सुनने और पत्रावलियों के अध्ययन करने के बाद चार दोषियों शादाब, आशिक अली, इजहार और निसार अहमद को सजा सुनाई है।
तीन दोषियों का अन्य जनपदों में रहा है आपराधिक इतिहास
डकैती डालने की घटना को अंजाम देने वाले दोषी शादाब, आशिक और निसार का अन्य जनपदों में आपराधिक इतिहास रहा है। तीनों का नाम बरेली, बदायूं और संभल के विभिन्न थानों में हिस्ट्रीशीटर की सूची में नाम दर्ज है।