वहां फरीदपुर की तरफ से आने वाले कुछ ट्रक सड़क किनारे खड़े थे। सड़क के दूसरी ओर मजार के पास कार खड़ी थी। कार में कुछ लोग बैठे थे व कुछ पास खड़े थे। अपना वाहन मजार से पहले ट्रकों की आड़ में खड़ा कराकर वह हमराह व चालक के साथ पैदल ही चल दीं। पास जाकर देखा तो कांस्टेबल मनोज चालक की सीट पर बैठा था।
पास खड़ा दूसरा व्यक्ति रुपये ले रहा था। इससे यकीन हो गया कि पुलिसकर्मी ट्रक चालकों से अवैध वसूली कर रहे हैं। आरोपी पुलिसकर्मियों को पकड़ने के लिए वह हमराही के साथ कार के सामने पहुंच गईं। कार की पिछली सीट पर कांस्टेबल रविंद्र और रावेंद्र बैठे थे।
एसपी को देखकर मच गई थी भगदड़
एसपी को देखकर वहां भगदड़ मच गई। कल्पना सक्सेना ने आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की तो मनोज ने कार स्टार्ट कर उनको कुचलने की कोशिश की, पर वह बच गईं। एसपी ने चलती कार में ही कांस्टेबल मनोज की गर्दन पकड़ ली। कार रोकने के लिए कहा लेकिन आरोपियों ने ऐसा नहीं किया। पीछे बैठे सिपाही रविंद्र ने कल्पना के हाथों को पकड़ लिया। उनके सिर पर वार किया और कहा कि इसको कुचलकर मार दो। आरोपियों ने उन्हें 200 मीटर तक घसीटा। कई बार कार को तिरछा चलाकर कुचलने की कोशिश की। जब नहीं कुचल पाए तो उनको धक्का देकर भाग गए थे।