मायावती सरकार में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रहे अवधेश वर्मा ने शनिवार को बसपा से त्यागपत्र दे दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने ददरौल विधानसभा क्षेत्र की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। हालांकि, उन्होंने आगे के पत्ते नहीं खोले हैं। इस बीच सियासी गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। चर्चा है कि वह भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
अवधेश वर्मा 2007 का विधान सभा चुनाव बसपा के टिकट पर ददरौल विधानसभा से जीते थे। मायावती ने उनको राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद से नवाजा था। 2012 का विधानसभा चुनाव उन्होंने भाजपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन चुनाव हार गए। 2017 का चुनाव आते-आते अवधेश वर्मा एक बार फिर से बसपाई हो गए। बसपा ने उनको तिलहर विधानसभा से प्रत्याशी बनाया था। यह चुनाव भी वह नहीं जीत सके। शनिवार को मीडिया को त्यागपत्र की विज्ञप्ति जारी की है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बसपा से किनारा कर वह एक बार फिर से भाजपाई बनने वाले हैं। हालांकि, उन्होंने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। अवधेश वर्मा का कहना है कि वह क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे हैं। क्षेत्र के विकास के साथ जनता का सम्मान उनकी प्राथमिकता है। वह जो भी कदम उठाएंगे वह ददरौल क्षेत्र की जनता के हित में होगा।
पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा ने जिलास्तर पार्टी पदाधिकारियों को अपने इस्तीफे की प्रति नहीं दी है। हो सकता है उन्होंने प्रदेश स्तर पर इस आशय की कोई सूचना भेजी हो या मीडिया को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी जानकारी दी हो। प्रेस नोट जारी कर दिया हो। उनका इस्तीफा स्वार्थ की राजनीति से अधिक कुछ नहीं है क्योंकि उनके पास आज जो कुछ भी है वह बसपा की ही देन है। वह पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार भी नहीं कर रहे थे। प्रचार के बारे में पूछा गया था। उसका वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके थे। एकाएक इस्तीफे की बात सामने आ गई।
- खेमकरन गौतम, जिलाध्यक्ष बसपा