तीन सौ बेड अस्पताल परिसर में बने आवासों से सामान निकलवाकर रखवाया बाहर
फोर्स को देखकर सहमे रहे 24 सेवामुक्त संविदा कर्मचारी, कराई गई वीडियो रिकॉर्डिंग
बरेली। सात माह से तीन सौ बेड अस्पताल परिसर में बने आवास पर कब्जा जमाए कार्यमुक्त संविदा कर्मचारियों को मंगलवार को बाहर निकाल दिया गया। एसीएम फर्स्ट प्रदीप रमन, सीओ थर्ड साद मियां और फ्लू कॉर्नर इंचार्ज डॉ. सतीश चंद्रा के नेतृत्व में फोर्स ने आवास खाली करवाए। अवैध कब्जेदारों द्वारा आवास पर लगाए ताले तोड़कर सामान बाहर रख दिया। पूरी गतिविधि की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई।
मंगलवार सुबह करीब ग्यारह बजे फोर्स के साथ एसीएम फर्स्ट और सीओ थर्ड तीन सौ बेड अस्पताल पहुंचे। फ्लू कॉर्नर इंचार्ज से अवैध कब्जेदारों की सूची लेकर आवासीय कॉलोनी की ओर बढ़ गए। उधर, फोर्स के आने की सूचना मिलते ही फ्लैट में रह रहे कार्यमुक्त संविदा कर्मियों ने सामान समेटना शुरू कर दिया। अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान हंगामा या विरोध प्रदर्शन करने पर मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी। फिर अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी और अधिकारियों के साथ आए कर्मचारी एक-एक कर सभी 17 फ्लैट में पहुंचे। जहां ताला मिला, उसे तोड़कर अंदर घुसे और सामान निकालकर बाहर रख दिया।
इस दौरान कुछ कर्मचारियों ने स्वयं ही आवास खाली करने के लिए समय मांगा पर उनकी सुनवाई न हुई। एसीएम फर्स्ट प्रदीप रमन ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अगर किसी कर्मचारी ने फिर से कब्जाने की कोशिश की तो उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। आवास खाली कराने के बाद उनमें ताला लगा दिया गया है।
सेवा निवृत्त संविदा कर्मियों का था कब्जा
सीएमओ कार्यालय के लिपिक आरआर रिचर्ड, स्टाफ नर्स (सेवा समाप्त) वेशपाल यादव, जुगविंदर, दीपाली, प्रीती गंगवार, पूजा बोहरा, ममता शाक्य, संतोषिनी दिग्गल, सचिन कुमार भारद्वाज, रितु, रीता सचान, स्वीटी प्रसाद, दिव्या भारती, दीक्षा वर्मा, शालिनी मैसी, उषा, अभिषेक कुमार, पवन, जगदीश सरन, रवि, रीना, स्वराज मोहम्मद, प्रमोद, राकेश चंद्र, राम प्रताप, सुभाष शर्मा, संजीव कुमार दुबे का आवास पर अवैध कब्जा था।
तीन बार दिया गया नोटिस मगर नहीं माने
डॉ. सतीश चंद्रा के मुताबिक, अवैध तरीके से रह रहे लोगों से आवास खाली करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन बार नोटिस दिया जा चुका था। डीएम मानवेंद्र सिंह निरीक्षण के बाद 14 दिसंबर को कार्रवाई होनी थी लेकिन फोर्स नहीं मिल सकी थी। मंगलवार को बलपूर्वक कब्जा हटाया गया। कार्यमुक्त कर्मचारी खुद से कब्जा हटा लें, इसके लिए पूर्व में बिजली और पानी का कनेक्शन भी काटा गया था।