बरेली। प्रदेश स्तरीय चयन प्रक्रिया से गुजरकर फुटबॉल छात्रावास में दाखिला पाने वाले खिलाड़ी अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। प्रशिक्षण की तैयारी और बेहतर भविष्य के सपने लेकर आए इन खिलाड़ियों को छात्रावास की जो स्थिति मिली, उसने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेल विभाग के इंतजाम भी सवालों के घेरे में हैं।
वर्तमान में छात्रावास में विभिन्न शहरों से आए 27 खिलाड़ी रह रहे हैं। हाल ही में आठ नए खिलाड़ी अयोध्या के शिविर में शामिल होने गए हैं। पड़ताल में सामने आया कि फुटबॉल हॉस्टल की बाहरी चमक के पीछे कुछ और ही कहानी है। खिलाड़ियों को जिन कमरों में ठहराया गया है, वहां की छतों की हालत बेहद खराब है। कई कमरों की सीलिंग पूरी तरह टूट चुकी है और प्लास्टर झड़ रहा है। लिंटर में गहरी दरारें आ गई हैं और सरिया बाहर दिखाई दे रही हैं। खस्ताहाल छत की वजह से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है। बाथरूम की हालत काफी दयनीय है। कई शौचालय पूरी तरह टूट चुके हैं। फर्श और दीवारों की टाइल्स जगह-जगह से उखड़ी हैं। कुछ टॉयलेट की सीटें भी टूटी हैं और उपयोग करने लायक नहीं हैं। साफ-सफाई नाममात्र की है और दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल है। संवाद
मच्छर भी कर रहे परेशान
हॉस्टल में साफ-सफाई की कमी के कारण मच्छरों की समस्या बढ़ती जा रही है। खिलाड़ियों का सोना मुश्किल है। कई खिलाड़ियों को डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का डर सता रहा है। न तो मच्छरदानी की व्यवस्था है, न ही मच्छर भगाने के लिए नियमित स्प्रे किया जाता है। खिलाड़ियों के मुताबिक, उन्हें कई बार समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिलता है।
हमारी ओर से लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। जो भी कमियां व खामियां सामने आ रही हैं, उन्हें हम दूर कर रहे हैं।
- चंचल मिश्रा, आरएसओ