बरेली। रोडवेज के पुराना और सेटेलाइट बस अड्डों पर रोजाना 25 से 30 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। मगर, यहां बिकने वाली खाने-पीने की चीजों की निगरानी नहीं होती। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते बस अड्डों की कैंटीन और आसपास लगने वाले ठेला-खोमचों से सैंपलिंग तक नहीं होती।
हाल ही में रेलवे स्टेशनों को लेकर आई कैग की रिपोर्ट के बाद जंक्शन पर सतर्कता और बढ़ा दी गई है। लगभग हर तीसरे दिन सैंपल लेकर जांच को दिल्ली भेजे जा रहा है। दूसरी ओर रक्षाबंधन से पहले भी जिम्मेदारों ने बस अड्डों पर बिकने वाले पानी और खाने-पीने के सामान की सैंपलिंग कराना जरूरी नहीं समझा है।
तमाम दुकानदारों का खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन में पंजीकरण भी नहीं है। इस संबंध में क्षेत्रीय प्रबंधक मोहम्मद अजीम का कहना है कि बस अड़्डों और आसपास ठेला-खोमचों से सैंपलिंग के लिए खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन को लिखा गया है।
सेटेलाइट बस अड्डे पर कैंटीन समेत खान-पान के चार स्टॉल
सेटेलाइट बस अड्डे के दोनों ओर दर्जनों की संख्या में खान-पान के सामान के ठेले-खोमचे लगे रहते हैं। परिसर के अंदर खुले नाले पर अस्थाई होटल चल रहा है। खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन यहां सैंपलिंग नहीं करता। परिसर के अंदर एक कैंटीन और तीन अन्य खान-पान के अधिकृत स्टॉल भी हैं। यहां भी सैंपल नहीं लिए जाते।