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तीन फ्लोर मिलों में टैक्स चोरी पकड़ी

Sun, 24 Jul 2016 01:34 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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वाणिज्य कर विभाग ने शनिवार को अचानक फ्लोर मिलों पर छापामार कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया जाता है कि गेहूं खरीद से ज्यादा आटा और अन्य उत्पाद तैयार करने में माहिर मिलों ने वाणिज्य कर और मंडी शुल्क में करोड़ों रुपये की टैक्स हेराफेरी की है। पुख्ता जानकारी मिलने पर विभागीय विशेष अनुसंधान शाखा ने फरीदपुर और पूरनपुर में सघन छापामारी कर संदिग्ध अभिलेख कब्जे में लिए हैं।
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बरेली मंडल में ज्यादातर फ्लोर मिलें मंडी समितियों की मिलीभगत से टैक्स चोरी कर गेहूं खरीदती हैं। दो दर्जनों से ज्यादा मिलें इस काम में ज्यादा सक्रिय हैं। काफी समय से वाणिज्य कर विभाग को गेहूं तस्करी और फ्लोर मिलों में टैक्स चोरी की सूचनाएं मिल रही थीं। तीन मिलों से संबंधित जानकारी पुष्ट होने पर एडिशनल कमिश्नर बीपी सिंह ने एसआईबी (विशेष अनुसंधान शाखा) टीम छापामारी में लगाई। पीलीभीत स्थित पूरनपुर में अग्रवाल रोलर मिल और आशुतोष फ्लोर मिल को घेरने के लिए जिला प्रशासन से सहयोग लिया गया। क्याेंकि दोनों मिलर प्रभावशाली बताए जाते हैं। एसआईबी प्रमुख पीके सिंह ने दोनों मिलों की घेराबंदी कर सघन चेकिंग कराई। इस दौरान दोनों मिलों पर स्टाक और अभिलेख में हेराफेरी मिली।
सूत्रों ने बताया कि फरीदपुर स्थित वर्धमान फ्लोर मिल मेरठ निवासी अनिल जैन संचालित करते हैं। उनका मुख्य फ्लोर मिल कारोबार मेरठ में है। इस मिल में हुई चेकिंग में बड़ी मात्रा में स्टाक गड़बड़ मिला है। एडिशन कमिश्नर बीपी सिंह ने बताया कि तीनों मिलों से संदिग्ध कारोबार संबंधी अभिलेख जब्त किए हैं। इनमें भारी टैक्स चोरी का अनुमान है। अभी जांच चल रही है। छापा कार्रवाई में उपायुक्त शिलाजीत सिंह, शिवकुमार, गोवर्धन लाल आदि मौजूद रहे।
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खरीद से ज्यादा बिक्री
गेहूं पर 2.50 प्रतिशत मंडी शुल्क और चार प्रतिशत वाणिज्य कर देय है। ज्यादातर मिलर गेहूं सीधे दलाल और किसान से खरीद लेते हैं। विभागीय मिलीभगत से इस पर मंडी शुल्क जमा नहीं करते हैं इसलिए वाणिज्य कर भी जमा नहीं होता है। क्योंकि  मंडी शुल्क जमा होते ही वाणिज्य कर आटोमेटिक बन जाता है। मिलें रातों रात आटा, मैदा, सूजी, चोकर आदि बना कर बिक्री कर देते हैं। गेहूं से बने उत्पादों पर टैक्स देय नहीं है, इसलिए रास्ते में इसकी चेकिंग भी नहीं होती है। 
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