आयकर विभाग ने जनधन खातों में ढाई लाख रुपये से कम जमा करने वालों की जांच पर ब्रेक लगा दिया है। इससे करीब पांच हजार ज्यादा खातेदारों को राहत मिल जाएगी।
नोट बंदी के दौरान तमाम लोगों ने अपना कालाधन ठिकाने लगाने के लिए जनधन खातों का सहारा लिया था। हजारों लोगों ने जनधन खातों में अनापशनाप रकम जमा करा दी थी, जिसकी जानकारी मिलते ही आयकर विभाग सक्रिय हो गया और डेढ़ लाख रुपये तक जमा करने वाले खातेदारों को नोटिस जारी होने लगे। बरेली परिक्षेत्र कार्यालय से करीब छह हजार से ज्यादा नोटिस जारी हुए। इनमें सबसे ज्यादा लोग खीरी और शाहजहांपुर जिले के शामिल थे। अंग्रेजी भाषा में पहुंचे नोटिसों को लेकर कई किसान और गरीब लोग बरेली स्थित आयकर कार्यालय पहुंचना शुरू हो गए।
प्रभावित लोगों से हुई जांच में ज्यादातर मामले सही पाए गए। गिनेचुने लोग ही जमा राशि की सही जानकारी नहीं दे पाए थे, इसलिए अब विभाग ढाई लाख रुपये से ज्यादा जमा करने वालों पर ही निगरानी करेगा। उच्चपदस्थ अधिकारियों के मुताबिक विभाग अब ढाई लाख रुपये से कम मामलों में कोई छानबीन नहीं करेगा।
पंपों पर एक प्रतिशत शुल्क वसूली नहीं
बरेली। पेट्रोल पंप पर लगी प्राईवेट बैंकों की पीओएस मशीनों के माध्यम से भुगतान करने पर एक प्रतिशत शुल्क नहीं लगेगा। यहां बता दें कि निजी बैंकों ने नौ जनवरी से चार्ज लेने की घोषणा की थी, जबकि सरकारी बैंक प्रबंधन पहले से कोई शुल्क नहीं ले रहा है।
नौ जनवरी से निजी बैंकों की पीओएस मशीनों के माध्यम से भुगतान करने वालों से एक प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वसूली पर पेट्रोल डीलर एसोसिएशन और तमाम ग्राहक संगठनों ने तीखा विरोध किया है। जिलाध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि ज्यादातर पंपों पर निजी बैंक आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, एक्सिस आदि की पीओएस मशीनों से भुगतान करने वाले कार्डधारकों से एक प्रतिशत मनमानी वसूली से सभी लोग नाराज हैं। एसोसियेशन ने मामला वित्त मंत्रालय पहुंचाया है, इससे 13 जनवरी तक अतिरिक्त शुल्क वसूली पर रोक लगा दी गई है। उधर, एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारी आरके गौड़ ने आग्रह किया है कि पंप संचालक सरकारी बैंकों की मशीनें ज्यादा लगवाएं, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी और ग्राहकों की जेब भी सुरक्षित रहेगी।