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Fake IAS Case: बरेली में जालसाज विप्रा शर्मा पर पांच और रिपोर्ट दर्ज, गिरोह के खातों की जांच शुरू

Sun, 10 May 2026 10:50 AM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

खुद को आईएएस अफसर बताने वाली विप्रा शर्मा और उसके गिरोह ने कई लोगों से ठगी की है। ठगी के शिकार पीड़ित अब मामले दर्ज करा रहे हैं। विप्रा और उसके गिरोह के खिलाफ पांच और पीड़ितों ने रिपोर्ट दर्ज कराई हैं। 
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आरोपी विप्रा शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा के नए कारनामे रोज सामने आ रहे हैं। सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगे गए पांच और पीड़ितों ने बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। अब तक विप्रा और उसके गिरोह पर कुल 21 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें से 19 मामले बारादरी थाने में ही लिखे गए हैं। पुलिस सभी मामलों की जांच कर रही है। 

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पीलीभीत निवासी हिना परवीन ने बताया कि विप्रा ने खुद को पीसीएस अधिकारी बताकर 1.90 लाख रुपये कंप्यूटर ऑपरेटर की सरकारी नौकरी दिलवाने के बहाने लेकर हड़प लिए। भमोरा के गांव सिंघा निवासी अजय के मुताबिक, उनके भाई बीमा कंपनी में काम करते थे। तभी 2025 में ग्रीन पार्क निवासी विप्रा शर्मा बीमा के बारे में जानकारी लेने दफ्तर आईं। विप्रा की कार पर एडीएम एफआर और उत्तर प्रदेश शासन लिखा था।

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चमक-दमक देखकर अजय ने उसे असली अधिकारी समझ लिया। बातचीत का सिलसिला बढ़ाकर विप्रा ने उसे पवन विहार स्थित अपने घर बुलाया। विप्रा ने सरकारी ड्राइवर की नौकरी के बदले तीन लाख रुपये ऐंठ लिए। इसके बाद तीन फर्जी नियुक्ति पत्र भेज दिए गए। परवाना नगर निवासी फरहत जहां ने बताया कि बीडीए अधिकारी के पद पर नौकरी दिलाने के बहाने विप्रा शर्मा ने चार लाख रुपये ठग लिए। 

ये लोग भी हुए ठगी के शिकार 
सिटी हार्ट निवासी दिलप्रीत सिंह ने बताया कि कंप्यूटर ऑपरेटर की सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर विप्रा शर्मा ने साढ़े तीन लाख रुपये ऐंठ लिए। फतेहगंज पश्चिमी निवासी अभिषेक मौर्य ने बताया कि विप्रा शर्मा ने उन्हें भी एडीएम बताकर सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। विप्रा की बातों में आकर दो लाख रुपये उसे दे दिए। दो लाख लेने के बाद विप्रा बहाने बनाने लगी और अधिकारी होने की धौंस देने लगी। अब पीड़ितों की ओर से बारादरी थाने में विप्रा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। 

विप्रा और उसके गिरोह के खातों की जांच शुरु
फर्जी आईएएस बनकर लोगों को चूना लगाने वाली विप्रा और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। पुलिस ने विप्रा, उसकी बहन शिखा, ममेरी बहन दीक्षा, ड्राइवर विनोद और पिता रिटायर सिंचाई अधिकारी वीरेंद्र के खातों की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। करीब 55 लाख रुपये की रकम फ्रीज कराई जा चुकी है। 
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अब पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि खातों में ये रकम कहां से आई और कहां इन लोगों ने इसे निवेश किया। अभी अन्य पीड़ित और आरोपी सामने आ सकते हैं। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि भविष्य में चार्जशीट होने के बाद गैंगस्टर की रिपोर्ट कर इनकी अवैध कमाई और संपत्ति को प्रशासन की मदद से जब्त किया जा सकता है।
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