बैक्टीरिया बनाने लगता है एंटीबॉडी
शोध में पता चला कि स्ट्रेप्टोकोकस का अगर शुरुआत में ही इलाज न हो तो वह शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करने लगता है। शरीर में मौजूद प्रोटीन को प्रभावित करते हुए एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस बनाने लगता है। इससे रूमेटिक बुखार, इम्पेटिगो, प्रसूति ज्वर, स्ट्रेप्टोकोकस शॉक सिंड्रोम, स्ट्रेप थ्रोट, टॉल्सिलाइटिस, जोड़ों का दर्द, ब्लड प्रेशर, हृदय आदि की बीमारियां होने लगती हैं। हार्ट अटैक की भी आशंका रहती है।
जहां इलाज वहीं सक्रियता ज्यादा
डॉ. भोजराज ने बताया कि स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया सबसे ज्यादा अस्पताल परिसर में होता है। क्योंकि वहां इलाज को पहुंचे मरीजों के खांसने, छींकने से हवा के कणों में या फिर गिरकर कुर्सी, मेज, दीवार पर चिपका रहता है। अगर बीमार व्यक्ति बगैर नाक, मुंह ढंके खांसे या छींके आसपास मौजूद स्वस्थ व्यक्ति की सांस के साथ बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाता है। वह लोगों को बीमार बना देता है।