बरेली। महिला अस्पताल के एमसीएच विंग में संचालित एसएनसीयू परिसर में अग्निकांड की घटना के करीब ढाई साल बाद अग्निशमन व्यवस्था दुरुस्त करने की कवायद शुरू हो गई है। शासन ने एक करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इससे ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कार्य होंगे।
नवंबर 2023 में मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) विंग के बरामदे में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। भर्ती बच्चों को हायर सेंटर रेफर करने के दौरान बदायूं मेडिकल कॉलेज भेजे एक नवजात की मौत हो गई थी। विद्युत सुरक्षा और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त जांच रिपोर्ट में एमसीएच विंग की डिजाइन पर सवाल उठे थे।
संंबंधित सुधार के लिए करीब दो करोड़ रुपये का बजट शासन से मांगा गया था। किन्हीं वजहों से बजट मुहैया नहीं हो सका। नतीजा, महिला अस्पताल को अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं मिली। भविष्य में अग्निकांड की संभावना बनी हुई थी।
मामले की गंभीरता पर अमर उजाला क्रमवार अस्पताल को एनओसी न मिलने और शासन में फाइल लंबित होने का मामला उठाता रहा। बीते माह भी रिपोर्ट प्रकाशित की गई। मामले का संज्ञान लेकर ढाई साल बाद शासन ने एक करोड़ का बजट जारी कर सुधार कार्य कराने को कहा है।
बिजली पैनल और बोर्ड के पास बना दिए शौचालय
ऑडिट के दौरान विद्युत सुरक्षा की रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक पैनल और मेन बोर्ड बाथरूम के पास होने से शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई थी। विंग के नक्शे में जहां इलेक्ट्रिक वायरिंग है, वहां कील या कोई सुराख न करने, अग्निशमन उपकरण दुरुस्त करने के निर्देश थे। सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक शासन से दो करोड़ का बजट मांगा था। एक करोड़ मिलेंगे। ऑडिट संबंधी कार्य कराएंगे।
जिला अस्पताल में 50 लाख से बेहतर होगी सुरक्षा
जिला अस्पताल अग्निशमन मानकों पर खरा है और एनओसी भी मिली चुकी है। हालांकि, माह भर पहले कायाकल्प टीम के निरीक्षण में अग्निशमन के उपकरण और बिजली वायरिंग जर्जर मिलने पर सुधार के निर्देश दिए थे। शासन से एक करोड़ का बजट मांगा गया था पर 50 लाख रुपये मिले हैं। एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित ने कहा कि प्राप्त बजट से वायरिंग और अन्य प्रस्तावित कार्य कराए जाएंगे।