आरोपियों ने रची थी ये साजिश
तय किया गया कि नदी किनारे संरक्षित पशु काटकर उसका मांस टेंपो से ले जाकर बेच दिया जाएगा। मांस के अवशेष उस्मान के खेतों में फेंक दिए जाएंगे। सुबह राहुल आकर हंगामा करेगा और रिपोर्ट में खेत मालिक उस्मान का भी नाम लिखाया जाएगा। बाद में सईद और अकरम उस्मान को बचाने के बहाने राहुल से उसकी सेटिंग कराएंगे और मोटी रकम वसूल कर लेंगे।
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शुक्रवार की रात घटना को अंजाम देना तय हुआ और राहुल ने देवेंद्र, सईद व दोस्त चांद उर्फ अजय को भी शामिल किया। सूत्र बताते हैं कि किसी तरह से उस्मान को भी इनकी योजना का पता लग गया और उसने पुलिस से अंदेशा जता दिया। इससे इन लोगों की योजना का भंडाफोड़ हो गया।
पहले कराते थे रिपोर्ट, फिर समझौते का दबाव
पुलिस सूत्रों के मुताबिक राहुल सिंह और उसके साथी किसी भी मामले में वादी बनकर रिपोर्ट कराने को बेताब रहते हैं। बाद में वह आरोपी पर दबाव बनाकर समझौता कर लेते हैं। अधिकांश मामलों में ये लोग अपनी हिंदुत्व वाली पहचान से पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। पुलिस भी ताज्जुब करती है कि किसी खेत में पड़े पशुओं के अवशेष ग्रामीणों की बजाय तड़के ही इन्हें कैसे दिख जाते हैं। संदेह के आधार पर राहुल व ऐसे ही अन्य लोगों से पुलिस ने पूछताछ भी की थी, पर साक्ष्य न होने पर ये बच गए।
सीओ हाईवे नितिन कुमार ने बताया कि भोजीपुरा में पुलिस ने गोकशी की सूचना मिलने पर छापा मारकर तीन लोगों को मौके से पकड़ा है। दो अन्य लोगों के साथ मिलकर इन्होंने एक काश्तकार को फंसाने की साजिश की थी। पांचों आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज कर तीन आरोपियों को जेल भेज दिया है। राहुल और चांद उर्फ अजय की तलाश की जा रही है।