शहर के नये मेयर उमेश गौतम चाहते हैं कि सभी नाले-नालियां शहर के नक्शे पर नजर आएं लेकिन नालों की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अतिक्रमण के चलते कई प्रमुख नाले अपनी जगह से गायब हो चुके हैं। कुछ जगह इनके निशान भर बाकी रह गए हैं। कई जगह नालों के ऊपर मकान-दुकान बन चुकी हैं। नगर निगम भी इनको भूल चुका है। अब नये नाले बनाने की कवायद जरूर हो रही है पर पुराने नालों को उनकी असली स्थिति में लाने के बारे में कोई नहीं सोच रहा है।
फोटो : सिविल लाइंस नाला
इस्लामिया मार्केट से राजकीय मूकबधिर विद्यालय के पिछले गेट और हनुमान मंदिर के पास से होते हुए अयूब खां चौराहा होकर संजय कम्युनिटी हॉल के पीछे तालाब में मिलने वाला यह नाला तो जमींदोज हो चुका है। जब इस नाले की पड़ताल की तो मूक बधिर विद्यालय के पिछले गेट पर लगा जाल नजर आया। आसपास के लोगों ने बताया कि जब पिछला गेट बनाया गया तो नाले के चलते ही यहां पर जाल बनाया गया। यह जाल तो अब भी मौजूद है लेकिन नाले का कहीं कोई सुराग नहीं है। अब तो यहां के लोग इस नाले को भी भूल चुके हैं। इस नाले में बिहारीपुर, इस्लामिया मार्केट, चौपुला आदि क्षेत्रों का पानी निकलता था। अंग्रेजों के जमाने के इस नाले को कुछ लोग कई नाला के नाम से भी जानते हैं।
फोटो: बरेली क्लब किनारे का नाला
गांधी उद्यान के अंदर से निकलकर पिछले गेट व बरेली क्लब के गेट से होकर यह नाला अक्षर विहार तालाब में जाकर मिलता था। यह नाला भी अब कहीं नजर नहीं आता है। मगर बरेली क्लब और इसके ग्राउंड के दरवाजे पर बनी दो पुलिया वहां पर कभी इस नाले के मौजूद होने की गवाही देती हैं। एक जगह पुलिया के पास नाले की थोड़ी सी दीवार भी बची है, जो बताती है कि यहां पर कभी नाला हुआ करता था। यहां पर नाला न होने के चलते ही पिछली बारिश में बरेली क्लब के पास सड़क पर तक जलभराव हो गया था। इस नाले में सिविल लाइंस क्षेत्र का पानी निकलता था।
फोटो : दि फ्रीबिल बैपटिस्ट चर्च वाला नाला
यह नाला बरेली क्लब के सामने स्थित दि फ्रीबिल बैपटिस्ट चर्च से होकर अक्षर विहार तालाब में मिलता था। यह नाला सिविल लाइंस बिजली बिजलीघर के पीछे व सैन्य प्रतिष्ठानों के पास से होकर दि फ्रीबिल बैपटिस्ट चर्च के सामने से अक्षर विहार तालाब में गिरता था। इस नाले में भी रामपुर गार्डन क्षेत्र का पानी आता था। मगर अब सिर्फ सिविल लाइंस बिजलीघर के पीछे स्थित पुलिया इस नाले की निशानी के तौर पर बची है। यह नाला भी अंग्रेजों के जमाने का था।
यह नाले भी हो गए गायब
- कुदेशिया फाटक स्थित सिंचाई विभाग वर्कशॉप की दीवार से सटकर एक नाला शास्त्रीनगर के अंदर से होकर किला नदी की ओर जाता था। मौजूदा समय में यह नाला खत्म हो चुका है, यहां पर मकान खड़े हो गए हैं।
- सिकलापुर में दिनेश नर्सिंग होम से होकर गुजरने वाला नाला बरेली कॉलेज के पास आकर बंद हो गया है। यहां से आगे पानी नहीं जाता है। इसमें सिकलापुर और रोडवेज के आसपास के क्षेत्र का पानी आता है।
डेढ़ करोड़ से ज्यादा खर्च फिर भी नाले गायब
नगर निगम हर साल बरसात से पहले नाला सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाता है लेकिन रस्मअदायगी के चलते कुछ नालों को आज तक खोजा नहीं जा चुका है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही नाला, सीवर व सफाई के नाम पर निगम ने डेढ़ करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किए हैं। इनमें 70.15 लाख रुपये सीवर और 86.46 लाख रुपये सफाई पर खर्च किए गए। इसी तरह हर साल करोड़ों रुपये इस मद में खर्च किए जाते हैं।
अधर में लटका प्रयास
पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर ने खोये हुए नाले खोजवाने का प्रयास किया था लेकिन कोई खास नतीजा नहीं निकला। चौपुला से अयूब खां चौराहा की ओर जाने वाला नाला पूरी तरह से जमींदोज हो गया था। इसे कागजों में ढूंढने के बाद खुदाई शुरू कराई गई। कुछ खुदाई हुई भी लेकिन काम पूरा नहीं हुआ और नाले में पानी निकलना आज तक शुरू नहीं हो सका।
वर्जन
सभी नालों को अतिक्रमण मुक्त कर खुलवाया जाएगा। शहर को स्मार्ट सिटी बनाना है। इसके लिए कोई भी अतिक्रमण बख्शा नहीं जाएगा, चाहें वह किसी का भी हो।
- डॉ. उमेश गौतम, मेयर