राजस्व घाटा नियंत्रित न हुआ तो खर्चों में कटौती करेगी सरकार
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कल्याणकारी योजनाओं से नहीं किया जाएगा कोई समझौता
बरेली। कोरोना के दौर में राजस्व प्राप्तियों के सारे लक्ष्य धराशायी हो जाने से प्रदेश सरकार को भारी घाटा हुआ है। यह घाटा कम करने के लिए कई उपाय किए गए हैं और कई और विकल्पों पर भी सरकार विचार कर रही है। इनमें सरकारी खर्चों में कटौती भी एक प्रमुख विकल्प है। सोमवार को बरेली आए प्रदेश वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने यह संकेत दिया। उन्होंने कहा कि इस सबके बावजूद कल्याणकारी योजनाओं को नहीं रोका जाएगा।
सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान खन्ना ने बताया कि अप्रैल में राजस्व प्राप्तियां सिर्फ डेढ़ प्रतिशत रही हैं। सरकार के आर्थिक संकट की वजह से मंत्रियों-विधायकों के वेतन में 30 प्रतिशत कटौती के साथ एक वर्ष की निधि भी स्थगित की गई है। जून 2021 तक के लिए राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता रोका गया है। छह और भत्तों पर भी रोक लगाई गई है। राजस्व प्राप्तियों में कमी को देखते हुए सरकार दूसरे संसाधनों से आय बढ़ाने के प्रयास कर रही है। एक सवाल के जवाब में वित्तमंत्री ने कहा कि वित्तीय घाटा पूरा करने को सरकार डीजल-पेट्रोल पर वैट बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। सरकार के सामने राजस्व वृद्धि करने की गंभीर चुनौती है। कोरोना से बचाव और संक्रमितों के इलाज में यूपी सरकार बाकी राज्यों से अच्छा काम कर रही है। इलाज और जांच की सुविधाएं भी बढ़ाई गई हैं। उन्होंने तीन सौ बेड अस्पताल शुरू होने के सवाल पर कहा कि एक पॉलिसी मैटर है अभी इसमें समय लगेगा।
राखी बंधवाने पहुंचे थे खन्ना
रविवार देर रात बरेली पहुंचे वित्त मंत्री सुरेश खन्ना सोमवार सुबह साहूकारा में अपनी बहन से राखी बंधवाने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कई रिश्तेेदारों से भी मुलाकात की। बरेली आने से पहले कुछ देर इन्वर्टिस कॉलेज रुके जहां मेयर के साथ भाजपा नेता अतुल कपूर और विशाल मेहरोत्रा ने उनका स्वागत किया। उन्होंने यहां कहा कि बरेली के विकास में धन की कमी आड़े नहीं आने देंगे।