इज्जतनगर के राजीव कुमार और दुर्गेश की चार साल बाद हुई संतान की खुशियों को किसी की नजर लग गई। इलाज में लापरवाही की ऐसी सजा बच्ची को मिली। शनिवार को काफी इंतजार के बाद एसआरएमएस मेडिकल इंस्टीट्यूट में डॉक्टराें की टीम ने बच्ची का सड़ चुका दाहिना पैर शरीर से अलग कर दिया। सेप्टिक उस पैर के सहारे पूरे शरीर में न फैल जाए इसलिए इसे काटना जरूरी था। बच्ची के दादा मक्खन लाल और दादी राजेश्वरी देवी ने नामकरण पर बच्ची के लिए पैर की पायल बनवाई थी, जो अब बच्ची नकली पैर में पहनेगी। बुआ सुमन ने रोते हुए कहा कि हर मां बाप का सपना होता है कि वह बच्ची को पहली बार चलते हुए देखें लेकिन यहां जो कुछ जो कुछ इस बच्ची के साथ हुआ है वह किसी और के साथ न हो। जबसे बच्ची के पैर काटने को डॉक्टरों ने कहा है तभी से मां दुर्गेश का रो- रोकर बुरा हाल है। जब बच्ची आपरेशन थियेटर में ले जाई गई तो दुर्गेश बेहोश हो गई। उनको सहारा दिया गया। वह तो कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। सिर्फ रो रही है। पिता राजीव कुमार का कहना था कि अगर डॉ. रवि खन्ना के अस्पताल में लापरवाही न की गई होती तो आज उनकी बच्ची का यह हाल न हो।
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को बच्ची का आपरेशन किया जाना था, लेकिन कुछ कारणों से इसे टाल दिया गया। शनिवार सुबह से ही डॉक्टर आपरेशन की तैयारी में लगे थे। बच्ची के चाचा, चाची, नानी, मामा, दादी, सभी आए हुए थे। बुआ सुमन ने बच्ची के रोने पर दूध पिला दिया, जबकि आपरेशन से पहले बच्ची को कुछ नहीं दिया जाना था। डॉक्टरों को बच्ची के दूध पीने की जानकारी मिली तो उन्होंने आपरेशन छह घंटे के लिए टाल दिया। शाम छह बजे के बाद आपरेशन शुरू हुआ। हड्डी रोग विशेषज्ञ के साथ अन्य विभाग के डॉक्टरों ने उसका आपरेशन किया। परिवार के लोगों ने डॉक्टरों से गुजारिश की है कि बच्ची का इतना हिस्सा बचा दें कि उसमें नकली पैर फिट हो सके। डॉक्टरों ने काफी संभालकर जांघ का थोड़ा हिस्सा बचाया है। डॉक्टरों ने परिवार से बताया है कि यह गारंटी नहीं ली जा सकती जो हिस्सा बचा है उसमें सेप्टिक होगा कि नहीं। 10 फीसदी चांस है कि उसमें सेप्टिक न हो। हालांकि डॉक्टराें ने सबसे अच्छी स्तर की एंटीबायोटिक चलाई है। इसे अभी जारी रखा जाएगा। बच्ची को पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा।
- कोर्ट ने सुनवाई 1 जुलाई को होगी
सीजेएम कोर्ट में शनिवार को मामले की सुनवाई होनी थी। लेकिन पुलिस की ओर से कोई रिपोर्ट न आने पर इसे एक जुलाई के लिए बढ़ा दिया गया है। दुर्गेश की ओर से दायर की गई याचिका पर पुलिस की ओर से भी रिपोर्ट आनी है। जिसमें यह बताया जाना है कि उनके यहां रिपोर्ट दर्ज की गई है कि नहीं। इसके बाद आगे कोर्ट आदेश करेगी।
- एमसीआई को किया मेल, स्वास्थ्य मंत्री को ट्वीट
आरटीआई एक्टिविस्ट मुहम्मद खालिद जिलानी ने इस मामले पर एमसीआई को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने पीएमओ को भी ट्वीट किया है। युवा बरेली सेवा क्लब की ओर से अध्यक्ष गुलफाम अंसारी ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ को ट्वीट किया गया।
- शांति देवी अपने नाम की तरह ही शांत रही
दो माह की बच्ची का नामकरण पर शांति देवी नाम पंडित ने रखा है। जबकि घर के लोगाें ने प्यार से परी बुलाना शुरू किया है। जिस तरह नाम है ठीक उसी तरह बच्ची भी शांत रही। पूरे इलाज के दौरान बच्ची ने तंग नहीं किया। आपरेशन से पहले तो परी खूब रोई लेकिन आपरेशन थियेटर में ले जाते समय भी परी शांत रही। एनेस्थीसिया दिये जाने के चलते वह आपरेशन के कुछ घंटे तक बेहोश थी।