बरेली। रोकथाम के तमाम प्रयासों के बावजूद संवेदनशील सूची में दर्ज गांवों में मलेरिया के मरीजों की तादाद नियंत्रित नहीं हो रही। इंडोर रेसिड्यूएल स्प्रे (आईआरएस) के बावजूद नए मरीज मिलने पर अब स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर जांच, सफाई और फॉगिंग कराई।
जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र कुमार के मुताबिक आईआरएस के बावजूद गांवों में जो मरीज मिल रहे हैं, वे विवैक्स मलेरिया से पीड़ित हैं। संभवत: पूर्व में वे मलेरिया के चपेट में रहे होंगे। दवा का कोर्स पूरा न करने से निष्क्रिय पैरासाइट्स सक्रिय हुए।
अब जो मरीज मिल रहे हैं, उनकी दवा का काेर्स पूरा कराया जा रहा है। साथ ही, 14 दिन बाद फॉलोअप जांच भी की जाएगी। सत्येंद्र के मुताबिक मझगवां, फतेहगंज पश्चिमी, शेरगढ़ और मीरगंज के संवेदनशील गांवों में इस बार मलेरिया विभाग की ओर से आईआरएस कराने की कार्ययोजना बनाई गई है।
मंगलवार को शेरगढ़ के परचई और म्यूड़ी बुजुर्ग में एंटीलार्वा, फॉगिंग, एक्टिव केस सर्वे किया गया। साथ ही, संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक अभियान की निगरानी की गई। ब्यूरो