वर्षों से गावों में 900 पर टिका महिलाओं का अनुपात पहली बार तेजी से बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो जनवरी से अब तक प्रत्येक माह गांवों में शहरों की अपेक्षा महिलाओं की तादाद बढ़ रही है। गांवों में फिलहाल महिलाओं का अनुपात 940 पर पहुंच गया है, जबकि शहरों में घटकर यह 900 हो गया है। विशेषज्ञ इसके पीछे ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव आने की वजह बता रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो वर्ष 2020 में गांवों में सालाना (प्रति माह एक हजार पुरुष पर) 11069 महिलाओं की तादाद रही, जबकि शहर में यह आंकड़ा 11102 रहा। वहीं, वर्ष 2019 में गांवों में महिलाओं की संख्या 10754 और शहरों में 10890 दर्ज हुई।
दोनों ही वर्षों में गांवों की अपेक्षा शहरों में महिलाओं का अनुपात ज्यादा रहा, लेकिन वर्ष 2021 की रिपोर्ट के तहत जनवरी से मई तक गांवों में 4741 और शहरों में 4524 महिलाओं की संख्या दर्ज हुई है। इसी साल की मासिक रिपोर्ट के तहत गांवों में एक हजार पुरुष के सापेक्ष 940 महिलाएं हैं, जबकि शहरों में यह संख्या नौ सौ है।
बड़े पैमाने पर दर्ज हुए इस बदलाव को विशेषज्ञ सकारात्मक पहल मान रहे हैं। उनके मुताबिक गांवों में भी अब संचार क्रांति पहुंच गई है। सरकारी/निजी क्षेत्र में नौकरी, खेल, शिक्षा, अभिनय, विज्ञान आदि क्षेत्रों में महिलाओं के आत्मनिर्भर होने की जानकारियां ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं। विशेषज्ञ इसे ग्रामीण समाज की सोच में बदलाव की वजह मान रहे हैं। साथ ही, जागरूकता अभियान और सरकार की कन्याओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं का भी असर बता रहे हैं।
सरकारी योजनाओं ने बेटियों के प्रति किया आश्वस्त
बरेली कॉलेज में समाजशात्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत कौर आहूजा के मुताबिक भ्रूण हत्या रोकने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं ने ग्रामीण वर्ग पर बोझ कम करने का काम किया है।
कन्या सुमंगला, भाग्य लक्ष्मी योजना, धनलक्ष्मी योजना समेत मुफ्त शिक्षा और विवाह के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समेत अन्य योजनाएं चल रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी कड़े कानून बने हैं। लिहाजा अभिभावक बेटियों की परवरिश, पढ़ाई-लिखाई, विवाह, सुरक्षा आदि को लेकर आश्वस्त हैं।