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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट: शहरों में घट रहा मगर गांवों में बढ़ रहा महिलाओं का अनुपात

Thu, 15 Jul 2021 06:09 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रति एक हजार पुरुषों पर शहरों में 900 और गांवों में 940 महिलाएं हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि गांवों में बढ़ रही जागरूकता और लॉकडाउन में अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद होना कारण इसकी वजह है।
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जनवरी से अब तक की मासिक रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वर्षों से गावों में 900 पर टिका महिलाओं का अनुपात पहली बार तेजी से बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो जनवरी से अब तक प्रत्येक माह गांवों में शहरों की अपेक्षा महिलाओं की तादाद बढ़ रही है। गांवों में फिलहाल महिलाओं का अनुपात 940 पर पहुंच गया है, जबकि शहरों में घटकर यह 900 हो गया है। विशेषज्ञ इसके पीछे ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव आने की वजह बता रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो वर्ष 2020 में गांवों में सालाना (प्रति माह एक हजार पुरुष पर) 11069 महिलाओं की तादाद रही, जबकि शहर में यह आंकड़ा 11102 रहा। वहीं, वर्ष 2019 में गांवों में महिलाओं की संख्या 10754 और शहरों में 10890 दर्ज हुई। 

दोनों ही वर्षों में गांवों की अपेक्षा शहरों में महिलाओं का अनुपात ज्यादा रहा, लेकिन वर्ष 2021 की रिपोर्ट के तहत जनवरी से मई तक गांवों में 4741 और शहरों में 4524 महिलाओं की संख्या दर्ज हुई है। इसी साल की मासिक रिपोर्ट के तहत गांवों में एक हजार पुरुष के सापेक्ष 940 महिलाएं हैं, जबकि शहरों में यह संख्या नौ सौ है।
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बड़े पैमाने पर दर्ज हुए इस बदलाव को विशेषज्ञ सकारात्मक पहल मान रहे हैं। उनके मुताबिक गांवों में भी अब संचार क्रांति पहुंच गई है। सरकारी/निजी क्षेत्र में नौकरी, खेल, शिक्षा, अभिनय, विज्ञान आदि क्षेत्रों में महिलाओं के आत्मनिर्भर होने की जानकारियां ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं। विशेषज्ञ इसे ग्रामीण समाज की सोच में बदलाव की वजह मान रहे हैं। साथ ही, जागरूकता अभियान और सरकार की कन्याओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं का भी असर बता रहे हैं।

सरकारी योजनाओं ने बेटियों के प्रति किया आश्वस्त
बरेली कॉलेज में समाजशात्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत कौर आहूजा के मुताबिक भ्रूण हत्या रोकने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं ने ग्रामीण वर्ग पर बोझ कम करने का काम किया है। 

कन्या सुमंगला, भाग्य लक्ष्मी योजना, धनलक्ष्मी योजना समेत मुफ्त शिक्षा और विवाह के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समेत अन्य योजनाएं चल रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी कड़े कानून बने हैं। लिहाजा अभिभावक बेटियों की परवरिश, पढ़ाई-लिखाई, विवाह, सुरक्षा आदि को लेकर आश्वस्त हैं।
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अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद होने का भी रहा असर
कोरोना महामारी के चलते पिछले साल मार्च से लॉकडाउन लगा। इस दौरान सभी अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद रहे। उधर, कोरोना संक्रमण की आशंका भी रही। माना जा रहा है कि इसकी वजह से मां के गर्भ में पल रहे भ्रूण की अवैध जांच न हो पाने से बच्चियों को ‘साकार’ होने का मौका मिला। इसका प्रभाव अब लिंगानुपात में बदलाव रूप में दिख रहा है। बता दें कि पिछले दिनों नवाबगंज, फरीदपुर, आंवला में अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर कार्रवाई भी हुई थी।

जनवरी से अब तक मासिक रिपोर्ट
माह        गांव    शहर     अंतर
जनवरी    945   944       01
फरवरी    972    875      97
मार्च       964   888      76
अप्रैल     918    904      14
मई        942    913      29
नोट: प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या।

सीएमओ डॉ. सुधीर गर्ग ने कहा कि महिलाओं के साथ भेदभाव रोकने के लिए सरकार की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। भ्रूण हत्या न हो, इसके लिए हमारी टीमें सक्रिय हैं। अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर लगातार कार्रवाई भी हो रही है। गांवों में पहली बार लिंगानुपात शहरों की अपेक्षा काफी बढ़ा है। जो बदलते गांवों की तस्वीर पेश कर रहा है।

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