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फैल्सीपेरम, डेंगू के बाद अब जिले में दिमागी बुखार का हमला

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बरेली। फैैल्सीपेरम मलेरिया (पीएफ) से पीड़ितों के आंक ड़े कम होने पर अपनी पीठ थपथपा रहे स्वास्थ्य विभाग की खुशी पर जापानी इंसेफ्लाइटिस ‘जेई’ यानी दिमागी बुखार का हमला हो गया है। दो साल बाद जेई पीड़ित मरीज की पुष्टि पर स्वास्थ्य विभाग सकते में आ गया है। आनन-फानन में सीएमओ ने आईडीएसपी यूनिट को सभी निजी अस्पतालों से संपर्क कर बुखार पीड़ितों की रिपोर्ट हासिल करनेे और डीएमओ समेत सीएचसी पीएचसी के चिकित्साधिकारियों को बुखार पीड़ितों की सघन जांच और इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।
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पिछले दिनों तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री की बैठक में फैल्सीपेरम पीड़ितों की संख्या में अप्रत्याशित कमी होने पर सीएमओ के प्रयास की सराहना हुई थी। हालांकि बाद में डेंगू के दो मरीज मिलने पर स्वास्थ्य विभाग पर आंकड़ों को छिपाने पर शासन ने स्पष्टीकरण मांगा था। इसमें आईडीएसपी की ओर से आंकड़े न देने पर सीएमओ ने नाराजगी जताई थी और आईडीएसपी प्रभारी को नोटिस दिया था। वहीं, अब 28 अगस्त को पुष्टि के बावजूद जेई की रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक जिले में जेई की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग को रोकथाम के बाबत व्यापक स्तर पर प्रचारप्रसार करना चाहिए था। संबंधित विभागों को सतर्कता के निर्देश के साथ ही संवेदनशील इलाकों में टीम भेजकर बुखार पीड़ितों की सघन जांच करानी चाहिए थी, ताकि जेई के वायरस कैसे आए इसका पता लगे और उससे बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जा सके, लेकिन यह सारी कवायद नहीं की गई और स्वास्थ्य विभाग संचारी रोग नियंत्रण अभियान के शुभारंभ की राह देखता रहा।
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28 अगस्त को हुई थी जेई
पीड़ित बुजुर्ग महिला की मौत
दो साल पहले तराई के लिए अभिशाप बना जापानी इंसेफेलाइटिस ‘जेई’ एक बार फिर कहर बरपा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक बीते दिनों जिले के एक मेडिकल कॉलेज में पीलीभीत की राजीव कॉलोनी निवासी बुजुर्ग महिला में जेई की पुष्टि हुई थी। 28 अगस्त को उनके निधन की सूचना मिली थी। वहीं 28 को ही नवाबगंज निवासी एक महिला में भी जेई की पुष्टि हुई है। मेडिकल कॉलेज में भर्ती इस महिला की हालत स्थिर बताई जा रही है। अफसरों ने जेई के रोक थाम के बाबत तराई क्षेत्रों में सघन अभियान चलाए जाने की बात कही है।
क्या है दिमागी बुखार
डॉक्टरों के मुताबिक ब्रेन फीवर यानी दिमागी बुखार के कई कारण होते हैं। इसमें वायरस से होने वाला इन्फेक्शन, खून में ग्लूकोज़ की कमी या बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण शामिल है। हालांकि इस बुखार की प्रमुख वजह क्यूलिक्स नामक मच्छर के डंक को माना जाता है, जो जैपनीज इंसेफ्लाइटिस नामक वायरस को फैलाता है। यही वायरस दिमागी बुखार के लिए जिम्मेदार होता है। बता दें कि यह इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर तेजी से हावी होता है, इसलिए अधिकतर बच्चे और बुजुर्ग ही इसका शिकार होते हैं।
जांच एवं उपचार
दरअसल ब्रेन के भीतर पाया जाने वाला फ्लूइड रीढ़ की हड्डी में भी मौज़ूद होता है, जिसकी जांच से यह मालूम हो जाता है कि शरीर में इसका वायरस है या नहीं, अगर ब्रेन में बीमारी के वायरस पाए जाते हैं तो लक्षणों के आधार पर इसका उपचार शुरू किया जाता है। उपचार के बाद भी यह बुखार शरीर या दिमाग पर कुछ ऐसे निशान छोड़ जाता है, जो ताउम्र बने रहते हैं। मसलन, हाथों/ पैरों या दृष्टि में कमजोरी जैसे प्रभाव भी नजर आ सकते हैं।
लक्षण
- तेज या हल्का बुखार, सिरदर्द, वोमिटिंग, लूज़ मोशन, मांसपेशियों में दर्द और बेहोशी आना प्रमुख लक्षण हैं।
बचाव
घर के अंदर या बाहर पानी जमा न होने दें। तेज धूप में बच्चों को बाहर न भेजें, उनके खानपान और सफाई का विशेष ध्यान रखें। संभव हो तो कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
जेई के मरीज की पुष्टि के बाद सभी स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट कर दिया गया है। सोमवार से संचारी रोग नियंत्रण माह की शुरुआत हो रही है। इसके तहत सभी संवेदनशील इलाकों में फॉगिंग, साफ सफाई कराई जाएगी और लोगों को बुखार से बचाव के प्रति जागरूक किया जाएगा। - डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ
आंवला के छह लोगों में फैल्सीपेरम की पुष्टि
आंवला। आंवला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ब्लॉक आलमपुर जाफराबाद के छह लोगों में फैल्सीपेरम (पीएफ) के मरीज जिला अस्पताल रेफर किए गए हैं। इसमें कटसारी गांव निवासी राहुल, ब्लॉक मझगवां क्षेत्र के अतरक्षेड़ी की शारदा, अवनीश, राजपुर कला की गुड़िया, भीमपुर की छवि को घातक बुखार पीएफ की जांच के बाद पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने स्थानीय केंद्र पर संसाधनों का अभाव बताकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
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