एंटीबॉडी टेस्ट कर सामुदायिक संक्रमण के साथ हर्ड इम्युनिटी का पता लगाने की होगी कोशिश
जांच के लिए 28 से 30 दिसंबर तक अलग-अलग क्लस्टर में 500 लोगों के लेगी ब्लड सैंपल
बरेली। कोरोना की शुरुआत के बाद जिले में अब तक 15 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं लेकिन इनमें से 70 फीसदी यानी करीब 10 हजार लोगों के संक्रमित होने का जरिया तलाश नहीं किया जा सका। इसे सामुदायिक संक्रमण का संकेत मानते हुए एक बार फिर सीरो सर्विलांस के तहत सर्वे कराने का फैसला लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को उन इलाकों को क्लस्टर बनाकर एंटीबॉडी टेस्ट करने का निर्देश दिया गया है जहां संक्रमण की दर कम है।
इस सर्वे का एक मकसद यह भी पता लगाना होगा कि जिले के लोगों में हर्ड इम्युनिटी तो विकसित नहीं हो रही है। इससे पहले मई और अगस्त में भी आईसीएमआर की 26 सदस्यीय टीम ने सीरो सर्विलांस के तहत जिले में सैंपल इकट्ठे कर उनकी जांच कराई थी। मई में सर्वे होने के करीब 25 दिन बाद आईसीएमआर की ओर से रिपोर्ट जारी कर संक्रमण की दर 0.7 बताई गई थी। यह रिपोर्ट जिले के दस क्लस्टर इलाकों में 410 लोगों की रैंडम सैंपलिंग के दौरान तीन लोगों के संक्रमित होने और ठीक हो जाने पर आधारित थी। दरअसल पहले चरण का सर्वे होने तक जिले में सिर्फ 33 व्यक्ति ही संक्रमित हुए थे और एक संक्रमित की मौत हुई थी। दूसरे चरण के सर्वे के दौरान 4855 लोग संक्रमित हो चुके थे और मौतों का आंकड़ा 110 को भी पार कर चुका था। इस सर्वे के दौरान करीब 22 सौ लोगों के संक्रमित होने का जरिया नहीं मिला था। हालांकि दूसरे चरण की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई।
अब जिले में 15 हजार से ज्यादा संक्रमित हैं और करीब दस हजार लोगों में संक्रमण का जरिया न मिलने की बात कही जा रही है। इसके साथ 160 से ज्यादा संक्रमितों की मौत हो चुकी है। इसे देखते हुए कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज होने के साथ हर्ड इम्युनिटी विकसित होने की भी संभावना जताई जा रही है। लिहाजा अब सीरो सर्विलांस के तहत सामुदायिक संक्रमण की जांच की जाएगी। इसके लिए प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेज दिया गया है। उन्हें क्लस्टर बनाने के साथ सर्वे के लिए आ रही आईसीएमआर की टीम के साथ रहने और उससे सहयोग करने को कहा गया है।
सीरो सर्विलांस: ब्लड सैंपल से होता है एंटीबॉडी टेस्ट
आमतौर पर संक्रमितों की आरटीपीसीआर जांच होती है मगर सीरो सर्विलांस में ब्लड सैंपल की रैपिड टेस्ट किट से जांच की जाती है। एंटीबॉडी आधारित इस जांच से पता चलता है कि संबंधित व्यक्ति कभी संक्रमित था या नहीं। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है यानी शरीर में एंटीबॉडी पाई जाती है तो इसका अर्थ होता है कि व्यक्ति संक्रमित था मगर रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने या वायरल लोड कम होने की वजह से उसमें लक्षण नहीं उभरे। यह भी संभावना मानी जाती है कि संक्रमित होने और ठीक होने के बीच उसके जरिये कई और लोगों में संक्रमण फैला होगा।
28 से 30 दिसंबर तक जिले में होगा सर्वे
केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण का समाज में फैलाव का पता लगाने का निर्देश दिया है, जिसके तहत आईसीएमआर की टीम सीरो सर्विलांस करने आएगी। संबंधित विभाग और संस्थान की ओर से सर्विलांस टीम में शामिल कर्मचारियों के आवागमन, रहने, खानपान, चयनित गांव में आवागमन के लिए वाहन, हेल्थ स्टाफ और सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी। ब्लड सैंपल कलेक्शन के लिए स्वास्थ्य विभाग एलटी उपलब्ध कराएगा। प्रशासन ने इन सभी व्यवस्थाओं के लिए सीएमओ को पत्र भेजा है। टीम 28, 29, 30 दिसंबर को बरेली में रहकर सैंपल लेगी और फिर वापस लौट जाएगी।
सीरो सर्विलांस के तहत समाज में संक्रमण का पता लगाने के लिए भारत सरकार की ओर से गठित टीम जिले में सर्वेक्षण करेगी। ऊपर से मिले निर्देशों के तहत व्यवस्था की जा रही हैं। क्लस्टर क्षेत्र का चयन आईडीएसपी सेल कर रहा है। हेल्थ स्टाफ भी टीम के साथ मौजूद रहेगा। - डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ