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सर्वोदय नगर में घुनों के हमले से बचने के लिए कान में रुई लगाकर सोते हैं लोग

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बरेली। सीबीगंज की सर्वोदयनगर कॉलोनी में एफसीआई के गोदाम से निकलने वाले घुनों ने आसपास रहने वाले रहने वाले सैकड़ों परिवारों का जीना दूभर कर दिया है। शाम होते ही जब घुन हवा में उड़कर लोगों के कान-नाक और आंखों में घुसते हैं तो बचना मुश्किल हो जाता है। यह हमला इतना जबर्दस्त होता है कि अचानक किसी बच्चे को सड़क पर रोते देखकर लोग समझ जाते हैं कि वह घुनों के हमले का शिकार हो गया है। लोग अपने बच्चों के साथ डॉक्टरो ंके चक्कर काटते-काटते परेशान हो चुके हैं, लेकिन फिर भी एफसीआई गोदाम का स्टाफ उनकी समस्या पर तरस खाने को तैयार नहीं है।
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सर्वोदयनगर के एफसीआई के गोदाम में हजारों क्विंटल सरकारी अनाज भंडारित है। गोदाम में रखे धान और चावल में नमी की वजह से घुन लग गया है। लोगों के मुताबिक लाखों की तादाद में ये घुन शाम होते ही उनका चैन से रहना दूभर कर देते हैं। इस गोदाम की बाउंड्री के पास कांशीराम आवास में तमाम परिवार रहते हैं। सर्वोदयनगर में भी सैकड़ों परिवार भी इन घुनों के हमले से बेहाल हैं। घुनों के खाने और पीने की चीजों में गिर जाने से लोग बीमार हो रहे हैं। घुन से बचाव के लिए लोगों को कान में रूई तक लगाकर सोना पड़ रहा है। कुछ लोगों ने बर्तनों में चिपके घुन भी दिखाए।

36 हजार मीट्रिक टन अनाज भी हो रहा सीलन से खराब
एफसीआई के इस गोदाम में 36 हजार मीट्रिक टन चावल व धान को स्टोर रखने की क्षमता है। अक्तूबर-सितंबर से मार्च तक होने वाली धान की खरीद का भंडारण होता है। इसके बाद यह अनाज कोटे की दुकानों पर जाने तक महीनों यही रखा रहता है। बताते हैं कि जर्जर गोदामों में कई जगहों पर भयंकर सीलन है। इसकी वजह से यहां घुन और चूहों अनाज को बर्बाद करते रहते हैं।
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लोगों का सवाल- क्यों नहीं करते दवा का छिड़काव
घुन से परेशान लोगों का कहना है कि जब वह शिकायत करते हैं तो कई बार एफसीआई गोदाम का स्टाफ दवा का छिड़काव करा देता है। कुछ दिन राहत मिलती है लेकिन फिर वही समस्या खड़ी हो जाती है। लोगों का आरोप है कि दवा का छिड़काव नियमित तौर से कराने के बजाय में इसमें भी गोलमाल कर लिया जाता है।
लोगों से बातचीत

एफसीआई वाले दवा का छिड़काव करते ही नहीं है। जब शिकायत करो तो कुछ दिन ठीक रहता है, इसके बाद फिर घुन आने शुरू हो जाते हैं। - जाफरी
शाम होते ही अनगिनत घुन उड़ने शुरू हो जाते हैं। खाना-पानी बचाना मुश्किल हो जाता है। शरीर में घुन चिपकने काटने से लोग परेशान हैं।-प्रवीण कुमार मिश्रा
रात में इतने ज्यादा घुन हो जाते हैं कि उनसे अपने कान और कान बचाना मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में लोग कानों में रूई लगाकर सोते हैं। -गोपाल
घुन की वजह से खाना बनाना तक दुश्वार हो गया है। घुन के खाने-पीने की चीजों में घुसने इलाके के लोग आए दिन बीमार हो जाते हैं। -संतोषी
शिकायत के बावजूद एफसीआई वाले दवा का छिड़काव नहीं करते। उन्हें लोगों की समस्या से कोई लेनादेना ही नहीं है। -विद्या देवी
घुन की वजह से मेरी बेटी अलीशा बीमार हो गई थी। उसके बचाने के लिए काफी इलाज कराना पड़ा। तमाम लोग इस दिक्कत से जूझ चुके हैं। -शबाना
मेरे दस माह के पोते के कान में घुन घुस गया था। काफी दवाई करानी पड़ी। डर बना रहता है कि घुन फिर न बच्चे के नाक या कान में घुस जाए। -कमरजहां

अनाज के गोदामों में नियमित तौर से दवा का छिड़काव कराया जाता है। अभी भी गोदामों में दवा डाली जा रही है। स्टाफ की तरफ से अनाज को सुरक्षित रखने को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरती जा रही। -केएन खान, मैनेजर डिपो, एफसीआई
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