गन्ना समिति सचिव को मिल से बाहर खींचा
किसानों ने गन्ना समिति के सचिव राजीव सेठ को मिल कैंपस से बाहर खींच लिया। इस दौरान धक्का मुक्की भी हुई। किसानों ने उन्हें धरने पर अपने साथ बैठाया। दोपहर करीब एक बजे एसडीएम की मध्यस्थता में किसानों के बीच मिल के सीईओ शरत मिश्रा को लाया गया। लेकिन किसान मिल प्रबंधन को झूठा बताते हुए मिल के सीएमडी हर्ष किला चंद्र से वार्ता करने पर अड़ गए। एसडीएम ने किसानों से कहा कि वो नहीं आए हैं उनके स्थान पर शरत मिश्रा से ही वार्ता होगी।
मिल प्रबंधन जमीन बेचकर करेगा भुगतान
एसडीएम ने कहा कि केसर मिल की मुड़िया फार्म की 29 एकड़ जमीन को बेचे जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। डीएम लगातार इसकी मानीटरिंग कर रहे हैं। मिल प्रबंधन सारा पैसा किसानों के पिछले भुगतान में भेजेंगे। किसान नेता चौधरी बिजेंद्र सिंह, इकबाल सिंह, केंद्र पाल सिंह, राकेश गंगवार, शोएब मलिक ,सरदार तरसेन सिंह किसानों की ओर से वार्ता के लिए तैयार हुए। इस पर मिल प्रबंधन ने 31 दिसंबर तक 135 करोड़ रुपये पिछला भुगतान करने की बात कही। इस पर किसान राजी नहीं हुए। घंटों बाद तय हुआ पिछला भुगतान 22 दिसंबर तक अदा किया जाएगा। एसडीएम , सीओ ने आश्वासन दिया कि अगर तय समय तक भुगतान नहीं दिया तो वह मिल के खिलाफ किसानों के साथ खड़े रहेंगे।
किसान नेता चौधरी बिजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि मिल के गन्ना जीएम व डिप्टी जीएम किसानों के बीच फूट डालने का काम करते हैं। विवाद कराते हैं। इधर, गन्ना समिति के निवर्तमान डायरेक्टर विनोद चौधरी ने कहा कि इस धरने में सितारगंज व अन्य चीनी मिलों के किसान बैठे हैं, इनको यहां से हटाओ ,इस पर किसानों ने विरोध कर दिया। पुलिस ने दोनों गुटों को अलग कर मामला शांत कराया। एसडीएम ने कहा कि भुगतान की मांग जायज है उसी पर बात हो।