बरेली। नौ दिनों तक शक्ति की उपासना करने के बाद महिलाओं ने सिंदूर खेलने की रस्म के साथ दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया। प्रतिमा विसर्जन के लिए लोग शोभायात्रा निकालकर रामगंगा तट पहुंचे। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की धाप पर जमकर नृत्य किया। इसके साथ ही पूजा पंडाल स्थापित कर चल रहे उत्सव का विश्राम हो गया।
उत्तर रेलवे मनोरंजन सदन में दुर्गा पूजा के अंतिम दिन कार्यक्रम की शुरुआत ‘सिंदूर उत्सव’ के साथ हुई। महिलाओं ने पहले मां दुर्गा को सिंदूर लगाया। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अगले वर्ष फिर से मां के आने की कामना की। ट्रकों व बसों के साथ जुलूस के रूप में जंक्शन से कचहरी, चौकी चौराहा, अयूब खां चौराहा होते हुए रामगंगा तट पर पहुंचे।
यहां पर ढाक, ढोल व नगाड़ों की आवाज से तट गूंज उठा। रामगंगा नदी में प्रतिमा विसर्जन करने के बाद वापस मनोरंजन सदन आकर सभी ने शांति जल और आशीर्वाद प्राप्त किया। मीडिया प्रभारी ध्रुव चटर्जी ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विकास राय चौधरी, मानस गोराई, सनत तरफदार, संजय दास, विशू राय चौधरी, चंचल डे का विशेष सहयोग रहा।
रामपुर बाग स्थित दुर्गाबाड़ी में भी रविवार को मूर्ति विसर्जन के साथ दुर्गा पूजा का विश्राम हो गया। अंतिम दिन कार्यक्रम की शुरुआत सुबह विजय दशमी पूजा से की गई। इसके बाद सिंदूर खेला हुआ। अंत में शांति जल कार्यक्रम के बाद पूजा मंडप का विसर्जन किया गया। कार्यक्रम में अमन सरकार, कल्याण दास, देवाशीष दत्ता, शुजोय मुखर्जी आदि का सहयोग रहा।