बरेली। परिवार नियोजन में पति भले ही पीछे हों, लेकिन पत्नियां इसमें आगे हैं। तभी तो जिला महिला अस्पताल में लगे जनसंख्या स्थिरता कार्यक्रम में पतियों की तुलना में पत्नियां आगे दिखीं। सिर्फ एक घंटे की प्रदर्शनी में करीब 250 महिलाआें को जागरूकता की जानकारी दी गई। हैरानी की बात है यह है कि यहां महिलाआें को सिर्फ कॉपर टी और नसबंदी साधन की ही जानकारी थी।
प्रदर्शनी में शहर के साथ गांवों से भी काफी महिलाएं आई हुईं थीं। फरीदपुर से आईं रजनी के सिर्फ दो बच्चे हैं। पति तीसरे बच्चे को कह रहे हैं। रजनी जानकारी लेने आई थीं कि कैसे उनके पति को समझाया जाए। इसी ब्लाक से आईं किशोरवती बताती हैं कि उनके पति ने नसबंदी कराने से मना कर दिया, बोले इससे उनको नुकसान है। वह बस यही समझने आई हैं कि नसबंदी से पुरुष को कोई नुकसान तो नहीं। गर्भवती महिला राजेश्वरी अपनी जांच कराने आईं थीं, लगे हाथ प्रदर्शनी में जानकारी के पर्चे भी लेती गईं। पॉप्यूलेशन सर्विस इंटरनेशनल संस्था के विनय मिश्रा ने बताया कि आधे से अधिक महिलाआें को परिवार नियोजन के नए तरीकों के बारे में नहीं पता हैं। उन्हें यहां इसके बारे में बताया गया।
रैली निकाली और नुक्कड़ नाटक भी हुआ
महिला अस्पताल से बच्चाें ने जनसंख्या जागरूकता की रैली निकाली। यह अय्यूब खां चौराहे तक गई। रास्ते में लोगों को जागरूक किया गया और कंडोम बांटे गए। जिला पुरुष अस्पताल की ओर नुक्कड़ नाटक किया गया। बताया गया कि आज जनसंख्या नियंत्रित करना कितना जरूरी है। नियोजन के तरीके भी बताए गए। रैली का उद्घाटन विधायक अताउर रहमान ने किया। इस मौके पर एडी हेल्थ डॉ. सुबोध शर्मा, सीएमओ डॉ. विजय यादव, सीएमएस डॉ. सुधा यादव व अन्य मौजूद थे।
परिवार नियोजन के टिप्स दिये
बरेली। परिवार नियोजित करने के लिए कॉपर टी और नसबंदी के अलावा कई तरीके बाजार में ैं। इसमें इंजेक्शन और डिवाइस की विधि प्रमुख है। जनसंख्या स्थिरता कार्यक्रम में पीएसआई संस्था के आशीष ने बताया कि महिलाओं को गर्भनिरोधक गोली, कंडोम और नसबंदी की ही जानकारी है जबकि इससे अच्छे साधन उपलब्ध हैं। इंजेक्शन तिमाही गर्भ निरोधक विधि है। यह महिलाओं में लगाया जाता है। इसके लगाने के तीन माह तक गर्भ धारण से बचा जा सकता है। डिम्पा की साधना बताती हैं कि इसके अलावा आईयूसीडी यानी इंट्रा यूरिन कांसाट्रेप्टिव डिवाइस के माध्यम से बिना चीरे और टांके के पांच साल तक के लिए गर्भधारण से छुटकारा पाया जा सकता है। पीएसआई के विनय मिश्रा ने बताया कि पीपीआईयूडी तरीका गर्भवती महिलाआें को प्रसव बाद लगाते हैं। यह आठ से दस साल के लिए होता है।