बरेली। करंट से जान गंवाने वाले विद्युत निगम के चार संविदा कर्मचारियों के परिवार अब मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। वह कभी विद्युत निगम के अधिकारियों के यहां जाते हैं तो कभी उप निदेशक विद्युत सुरक्षा के कार्यालय। मगर, समाधान उन्हें कहीं से नहीं मिल पा रहा।
18 अप्रैल को 11 केवी लाइन ठीक करते समय करंट लगने से हरुनगला उपकेंद्र के संविदा लाइनमैन किशनपाल की जान चली गई थी। 11 मई को रिठौरा उपकेंद्र के संविदा लाइनमैन सुरेश की एअरपोर्ट फीडर पर शटडाउन के दौरान आपूर्ति चालू किए जाने से मौत हो गई। विद्युत निगम के अधिकारियों ने उस समय मामले को शांत करने के लिए कर्मचारियों के परिवार को 20-20 हजार की तात्कालिक सहायता दे दी।
आश्वासन दिया कि परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नियुक्ति और 7.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। दोनों मामलों में जांच के लिए कमेटी बनाई गई। जांच में किसी की लापरवाही तय नहीं हो सकी और जांच कमेटियों ने जेई से लेकर एसडीई तक को क्लीन चिट दे दी। मामलों में अब विद्युत सुरक्षा निदेशालय के स्तर से जांच की जा रही है।
अभी संबंधितों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। किशनपाल के परिवार में पत्नी नीतू और एक बेटा है। नीतू ने बताया कि अब तक मुआवजे के नाम पर कोई सहायता नहीं मिली है। सुरेश के परिवार में पत्नी जमुना के अलावा तीन बेटे और दो बेटियां हैं। वह भी मुआवजे के लिए भटक रहीं हैं। इसके अलावा बहेड़ी और आंवला के भी दो कर्मचारियों के परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है।
विद्युत निगम के स्तर से जांच पूरी होने के बाद विद्युत सुरक्षा निदेशालय जांच कर रहा है। सभी पक्षों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। जांच पूरी होने के बाद मुआवजे की संस्तुति की जाएगी।- ओम प्रकाश, उप निदेशक विद्युत सुरक्षा निदेशालय