दो हजार रुपये में फर्जी यूडीआई कार्ड (यूनीक डिसएबिलिटी आईडी ) बनाने वाला जालसाज रंगेहाथ धरा गया है। रणनीति के तहत सीएमओ और एसडीएम सदर ने टनकपुर हाईवे पर आरोपी को उस वक्त पकड़ा जब वह एक व्यक्ति को फर्जी यूडीआई कार्ड देने पहुंचा था। सीएमओ कार्यालय के एक कर्मचारी ने कोतवाली में तीन के खिलाफ तहरीर दी है।
दरअसल, जिले में यूडीआई कार्ड को लेकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। फर्जी यूडीआई कार्ड के जरिये लोग परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ ले रहे हैं। सीएमओ के फर्जी साइन से यूडीआई कार्ड जारी करने का मामला करीब दो माह पूर्व सामने आया था। इसमें दो आरोपी पकड़े गए थे, हालांकि सीएमओ की ओर से तहरीर नहीं दिए जाने की बात कहकर कोतवाली पुलिस ने हिरासत में लिए आरोपियों को छोड़ दिया था।
दो दिन पूर्व फिर सत्यापन के दौरान इसमें फिर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। कोतवाली क्षेत्र निवासी ईश्वरी दयाल ने पंद्रह सौ रुपये देकर यूडीआई कार्ड घर के नजदीक सर्वेश की दुकान से बनवाया था। संदेह होने पर ईश्वरी प्रसाद कार्ड लेकर सीएमओ कार्यालय सत्यापन कराने पहुंचे तो फर्जीवाड़ा का पता चलने पर आरोपी की धरपकड़ को रणनीति बनाई गई। रुपयों का झांसा देकर एक अन्य व्यक्ति का कार्ड बनाने की गुजारिश की गई।
इस पर आरोपी सर्वेश व उसका साथी दो हजार रुपये में यूडीआई कार्ड बनाने पर राजी हो गया। बुधवार को आरोपी युवक को टनकपुर हाईवे स्थित जिला पंचायत बारात घर के सामने बुलाया गया। यहां सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल और एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी पहले से मौजूद थीं। जैसे ही आरोपी सर्वेश अपने एक अन्य साथी के साथ पहुंचा उसे पकड़ लिया गया।
सीएमओ कार्यालय के कर्मचारी इमरान ने सर्वेश समेत तीन के खिलाफ तहरीर दी है। प्रभारी निरीक्षक एसके उपाध्याय ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सर्वेश के शैक्षिक रिकॉर्ड चेक करने पर पता चला कि उसका असली नाम विशाल है।