बरेली/आंवला। जीवित लोगों का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनाकर महिलाओं के नाम पर विधवा पेंशन स्वीकृत कराकर 1.23 करोड़ रुपये हड़पने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान आंवला थाना क्षेत्र की बसंत बिहार कालोनी निवासी हरीश कुमार, शास्त्री गली निवासी शांतिस्वरूप, गांव बिलौरी निवासी मुनीष और भमोरा थाना क्षेत्र के गांव सेंधा निवासी प्रमोद के रूप में हुई है। बुधवार को पुलिस ने आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। वहां से सभी को जेल भेज दिया गया। हरीश व शांति स्वरूप के खिलाफ पहले से तीन-तीन मामले दर्ज हैं।
एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा ने बताया कि फतेहगंज पश्चिमी थाना क्षेत्र के गांव अगरास निवासी धर्मेंद्र काफी समय से आंवला की शास्त्री गली में किराये के मकान में रहता था। उसने यहां एक कंपनी खोली थी। धर्मेंद्र के गिरोह के सदस्य गांव-देहात में अशिक्षित और कमजोर वर्ग की महिलाओं से संपर्क कर उनको सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर आधार कार्ड समेत अन्य कागजात जुटाते थे। जनसेवा केंद्र पर महिलाओं के पति के फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार करते थे।
महिलाओं का बैंक खाता खुलवाकर पासबुक, डेबिट कार्ड अपने पास रख लेते थे। इसके बाद विधवा व वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत कराते थे और रुपये अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। गिरोह 2021 से फर्जीबाड़ा कर रहा था। आरोपियों में हरीश जनसेवा केंद्र चलाता है। वह बैंक मित्र भी है। ऐसे में महिलाएं उस पर आसानी से भरोसा कर लेती थीं। उसके लिए बैंक खाता खुलवाने में भी कोई समस्या नहीं होती थी।
अब तक विधवा पेंशन के 56 और वृद्धावस्था पेंशन के दो मामलों में 1.23 करोड़ रुपये हड़पने का मामला सामने आया है। घपले की रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती ह्रै। जिन महिलाओं के नाम ये खाते खुलवाए गए थे, पुलिस उनकी भी तलाश कर रही है। मामले की जांच एसआई राजेश बाबू मिश्रा को सौंपी गई है।
छह फर्जी प्रमाणपत्र मिले, रकम दोगुनी करने का देते थे झांसा
जांच के दौरान आरोपियों के पास से पुलिस को छह फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र भी मिले हैं। इनमें कुछ प्रमाणपत्र शहरी और बाकी ग्रामीण क्षेत्र के हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि इन प्रमाणपत्रों के जरिये वह विधवा पेंशन के लिए आवेदन करने की तैयारी में थे। इससे पहले पुलिस ने उनको पकड़ लिया। हरीश कुमार, शांतिस्वरूप, मुनीष, प्रमोद ग्रामीणों व महिलाओं को रुपये दोगुना करने व सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते थे। फर्जी दस्ताबेज हरीश के जनसेवा केंद्र पर तैयार किए जाते थे।
नौ लोगों को किया था नामजद, जांच में खुल रहीं परतें
आंवला थाना पुलिस ने 31 अक्तूबर को हरीश, शांतिस्वरूप, सौरभ, सुलदीप, मुनीष, भूरे, नीरज, धर्मदेवी, उषा के साथ ही 10 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। मामले की जांच शुरू की गई तो एक-एक कर परतें खुलने लगीं। पता लगा कि गिरोह 2021 से फर्जीबाड़ा कर सरकार को चूना लगा रहा है। पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है। संवाद