बरेली। मच्छर जनित बीमारी फाइलेरिया के खिलाफ जिले में बड़ा अभियान चलाने की तैयारी है। शुरूआत स्कूलों से होगी। सभी परिषदीय स्कूलों में 4800 बच्चों की जांच का लक्ष्य रखा गया है। शहर के तीन वार्डों समेत दस स्थानों से पांच हजार नमूने लिए जाएंगे। वर्तमान में बरेली में फाइलेरिया के 102 मामले हैं। इनमें 10 मामले माइक्रो फाइलेरिया यानी घातक स्थिति के हैं।
फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर शाम पांच बजे के बाद ही काटते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि स्वस्थ व्यक्ति को फाइलेरिया की आशंका तब और बढ़ जाती है जब क्यूक्लेस मच्छर किसी फाइलेरिया के रोगी को काटने के बाद उसे काटेे। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि दस स्थानाें पर जाकर दो साल से अधिक उम्र के 5000 बच्चों के नमूने लेने हैं। स्कूलों में छह से सात साल के 4800 बच्चों के नमूने अभियान में लिए जाएंगे। अभियान अक्तूबर से शुरू होगा।
- फाइलेरिया के लक्षण
तेज बुखार आना, हाथ पैर की नसें फूलना, दर्द होना, शरीर में गिल्टियां उभरना, हाथ, पैर और गुप्तांग में सूजन आना। कभी- कभी फाइलेरिया रोगी के पैरों में सूजन भी दिखाई नहीं देती है। मलेरिया अधिकारी डॉ. पीके जैन बताते हैं कि फाइलेरिया का इलाज पूरी तरह मुमकिन हैं।
- खतरनाक है फाइलेरिया
फाइलेरिया होने के एक साल बाद लक्षण सामने आते हैं। क्यूलेक्स मच्छर सैकड़ों की तादात में काटते हैं, तब असर होता है। काटने पर शरीर में छेद होते हैं, जिसमें क्यूलेक्स मच्छर लार्वा छोड़ते हैं। यह लार्वा शरीर के अंदर पसीने के साथ प्रवेश करते हैं। शरीर के अंदर अगर एक मादा और नर क्यूलेक्स मच्छर पहुंच जाएं तो वे एक बार में पांच हजार अड्डे देेते हैं, जो फाइलेरिया को अपंगता में बदलते हैं। यह अपंगता जल्दी ठीक नहीं होती।
- करें उपाय
आसपास पानी न जमा होने दें
सोते समय मच्छरदानी लगाएं
नीम, सरसाें का तेल लगाकर सोएं
बुखार होने पर डॉक्टर को दिखाएं
वर्जन--
‘क्यूलेक्स मच्छर सबसे ज्यादा हमारे आसपास होते हैं। यह दीवाराें पर नहीं बैठते बल्कि ताराें पर बैठते हैं। 26 सितंबर को जिले का प्रशिक्षण डीएम कार्यालय में होगा। इसके बाद टीम कार्य करेगी।’
डॉ. पीके जैन, जिला मलेरिया अधिकारी