बरेली। हीमोफलिया पीड़ित जिले के सात मरीजों को फैक्टर सात की जरूरत पड़ रही है, लेकिन शासन से आपूर्ति न होने से वह भटक रहे हैं।
हीमोफीलिया जन कल्याण सोसायटी के सचिव राजेश रस्तोगी के मुताबिक, जिले में फैक्टर आठ के सर्वाधिक मरीज हैं। कुछेक को फैक्टर नौ की जरूरत होती है। ये दोनों फैक्टर जिला अस्पताल में मिल जाते हैं। इधर, जनवरी में सात मरीज ऐसे मिले हैं, जिन्हें फैक्टर सात की जरूरत है। यह अस्पताल में मौजूद नहीं है। उन्हें हायर सेंटर यानी लखनऊ भेजा जा रहा है। फैक्टर की कमी से गंभीर मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इसलिए शासन से मरीजों की संख्या के मुताबिक फैक्टर सात उपलब्ध कराने की मांग की है। जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दिया जाएगा।
राजेश के मुताबिक, अगर फैक्टर समय पर मिलता रहे और आकस्मिक दुर्घटना या चोट से बचाव हो तो मरीज की जीवन प्रत्याशा बढ़ जाती है। दस वर्ष पूर्व पीड़ित व्यक्ति की जीवनरेखा अधिकतम 30 वर्ष थी जो अब 50 के पार पहुंच रही है।
प्रभारी एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित के मुताबिक, हीमोफीलिया रक्तस्राव से संबंधित आनुवंशिक रोग है। इसमें खून के धक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। चोट लगने के बाद रोगी को अन्य मरीजों की तुलना में ज्यादा रक्तस्राव होता है। इससे मौत की आशंका होती है, पर तभी फैक्टर लग जाए तो थक्के बनने से खून बहना बंद हो जाता है। जिला अस्पताल में फिलहाल 280 पंजीकृत रोगियों का निशुल्क इलाज हो रहा है। दवाएं और फैक्टर समेत जरूरत पड़ने अस्पताल प्रशासन रक्त भी निशुल्क मुहैया कराता है।