बदायूं। जिले के हेपेटाइटिस सी व बी के मरीजों को वायरल लोड की जांच होने के बाद ही दवा दी जाती है। इससे पहले उनकी कई जांचें कराई जाती है। बाकी सभी जांचे जिला अस्पताल में हो जाती हैं, लेकिन वायरल लोड की जांच को सैंपल लखनऊ भेजा जाता है। करीब एक महीने के बाद ही जांच रिपोर्ट आ रही है। इसकी वजह से मरीजों को समय पर दवा भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मरीजों की हालत बिगड़ रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में वायरल लोड की जांच की सुविधा है, लेकिन जांच नहीं की जा रही है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज की लैब अत्याधुनिक मशीनों से लैस है। यहां स्टाफ भी है, बावजूद इसके हेपेटाइटिस-सी और बी के मरीजों की जांच नहीं की जा रही है। इसकी दवा जिला अस्पताल में मिलती है। लेकिन वायरल लोड की जांच को मरीजों के सैंपल लखनऊ भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने व मरीज का इलाज शुरू हाेने में एक महीने से अधिक लग जा रहा है। अगर जिले के मेडिकल ही वायरल लोड की जांच कराई जाए तो चार से पांच दिन में ही मरीजों का दवा भी मिल जाए, लेकिन यहां तो रिपाेर्ट ही एक महीने से पहले नहीं मिल पा रही है। मरीजों को भटकना पड़ता है। तबीयत में सुधार होने की बजाय हालत और भी बिगड़ जाती है। जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या 33 सौ है। संवाद
क्या है वायरल लोड
वायरल लोड परीक्षण किसी व्यक्ति के खून में वायरस की मात्रा का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह परीक्षण, कई तरह की बीमारियों के लिए किया जाता है, जैसे कि एचआईवी और हेपेटाइटिस सी आदि।
मेडिकल कॉलेज में जांच की सुविधा है, लेकिन वहां जांच नहीं हो पा रही है। शासन से भी पत्र भेजा गया है। जैसे निर्देश मिलेंगे उसी पर काम किसा जा जाएगा। फिलहाल सैंपल लखनऊ भेजकर जांच कराई जा रही है। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल