एक फरियादी की शिकायत पर बुधवार को जिलाधिकारी ने बाबू को तलब किया तो पता चला कि बाबू के नाम पर रिश्वत लेने वाला कोई बाहरी व्यक्ति था। अभी इसकी शिनाक्त होनी बाकी है। इस खबर का संज्ञान लेकर अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को शहर के कुछ दफ्तरों का जायजा लिया तो पता चला कि यहां तो कई दफ्तर बाहरी लोगों के भरोसे चल रहे हैं। ये वो बाहरी लोग है जिनको न तो विभाग से वेतन मिलता है और न ही अन्य सुविधाएं। फिर भी समर्पण भाव से काम में डटे हैं जाहिर है ये ऊपरी कमाई के हिस्से पर काम चला रहे होंगे। अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट।
नगर निगम के सीन
समय - एक बजे। स्थान-नगर निगम का रिकार्ड रूम। कटे फटे अभिलेखों और फाइलों की रेक लगी है। कर्मचारी संजय कुर्सी पर बैठे हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सलीम दो महीने पहले रिटायर हो चुके हैं। वह नगर निगम पर इतने मेहरबान हैं कि रिटायर होने के बाद भी ड्यूटी कर रहे हैं। अमर उजाला टीम के आने की सुगबुगाहट लगते ही वह कहीं गायब हो गए। फिर बहुत देर तक दफ्तर नहीं गए।
समय- 1.30 बजे। स्थान- नगर निगम का निर्माण विभाग। जेई का स्टाफ रूम है लेकिन अवर अभियंता गायब हैं। यहां ह्दयेश नाम के सज्जन कुर्सी पर विराजमान हैं। वह निगम के परमानेंट कर्मचारी नहीं हैं। फिर भी सड़क और नाली का सर्वे करने से लेकर निर्माण तक का सुपरवीजन करते हैं। फिर जेई को अपनी रिपोर्ट देते हैं। अब्दुला भी कर्मचारी न होकर प्राइवेट तौर पर रखे गए हैं।
समय- 2.00 बजे। स्थान- कंट्रोल रूम के बगल वाला कमरा। गांधी उद्यान लिपिक मोहसिन रिजवी दो महीने पहले रिटायर हो चुके हैं। फिर भी ये लगातार ड्यूटी करने आते हैं। नगर निगम के टैक्स विभाग में चार, राजस्व में तीन, जलकल में चार और स्वास्थ्य विभाग में चार कर्मचारियों को न तो आउटसोर्सिंग से रखा गया है और न ही स्थाई या अस्थाई कर्मचारी हैं। फिर भी कंप्यूटर पर इनको काम करते देखा जा सकता है।
साहब की सफाई
नगर निगम में स्टाफ की भारी कमी है। शासन से लंबे समय से भर्तियां नहीं हुई हैं। आउटसोर्सिंग के कर्मचारी भी काम कर रहे हैं। इनमें ही ये भी होंगे। अगर कहीं गड़बड़ी होगी तो जांच कराई जाएगी।
- ईश शक्ति कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
आरटीओ कार्यालय
समय: दोपहर एक बजे। परमिट अनुभाग में सभी लिपिक अपने पर काम पर लगे हैं। यहां चार लिपिक हैं जबकि इस अनुभाग में दस लोग थे। कोई फाइल पकड़े हुए था तो कोई कंप्यूटर पर काम कर रहा था।
रिकार्ड रूम में छह लोग फाइलें चेक कर रहे थे। जब कैमरे की फ्लैश चमकी तो सभी भाग खड़े हुए। रजिस्ट्रेशन अनुभाग में भी बाहरी कर्मचारी भागने लगे। आरटीओ कार्यालय में करीब 27 कर्मचारी काम करते हैं लेकिन बाहरी लोगों की घुसपैठ बनी रहती है। पिछले साल हनी सिंह नाम के कर्मचारी से लाइसेंस बनवाने आए पिता पुत्र की मारपीट हो गई थी। लेकिन जांच में पता चला कि हनी सिंह यहां का कर्मचारी ही नहीं था लेकिन काउंटर पर बैठा था। इसके बाद यहां यहां सीसी कैमरे और बाहरी लोगों पर रोक का आदेश हुआ लेकिन उसका असर नहीं दिखता है। लाइसेंस, परमिट, रजिस्ट्रेशन , आरआई सेक्शन में करीब 17 कर्मचारी बाहरी लगे हैं। ये अपना खर्चा दूसरों का काम करके निकालते हैं। हालांकि बायोमैट्रिक में प्राइवेट एजेंसी के कर्मचारी हैं।
सदर तहसील:
समय-साढ़े तीन बजे। तहसील सदर के कानूनगो अवधेश यादव तो नहीं थे लेकिन उनके कक्ष में तीन लोग थे। उनके कक्ष में एक लेखपाल और दो प्राइवेट व्यक्ति काम निपटा रहे थे। उनसे पूछा तो वह कोई जानकारी नहीं दे पाए। इसी कार्यालय में एक अन्य बाहरी व्यक्ति सरकारी काम काज को निपटाते हुए मिले।
सब रजिस्ट्रार कार्यालय
: समय 04 बजे। सब रजिस्ट्रार के रिकार्ड रूम में सालों पुराना रिकार्ड बाहरी व्यक्तियों के हवाले हैं। यही बैनामा, 12 साला तथा अन्य अभिलेख निकालकर देते है। उसकी एवज में सुविधा शुल्क ली जाती है। सब रजिस्ट्रार एक के कार्यालय एक बाहरी व्यक्ति रजिस्ट्री के रिकार्ड को कंप्यूटर में फीड करते हुए मिले।