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लेबल बदलकर एक्सपायर दवाएं फिर बाजार में.. छापे में मिला बड़ा जखीरा

Wed, 30 Sep 2020 01:51 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बड़ी ब्रह्मपुरी में थोक दवा सप्लायर पर एफएसडीए की कार्रवाई में खुला गोरखधंधा
 
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पकड़ी गई दवाओं की लिखा पढ़त करते अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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विस्तार
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हजारों की दवाएं जब्त, लैब में होगी जांच, बगैर लाइसेंस फूड सप्लीमेंट का भी कारोबार

बरेली। मेडिकल स्टोरों से खरीदी गई दवाओं पर लगा लेबल उसके एक्सपायर होने की चाहे जो तारीख बता रहा हो लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि दवा वाकई एक्सपायर नहीं है। एफएसडीए के प्रवर्तन दल के छापे में मंगलवार को बड़ी ब्रह्मपुरी के थोक दवा सप्लायर ग्लोबल फार्मा के यहां एक्सपायर हुई दवाओं का भारी जखीरा पकड़ा गया। इन दवाओं को नए लेबल लगाकर बाजार में सप्लाई की जा रही थी। यही नहीं बगैर लाइसेंस के फूड सप्लीमेंट का कारोबार करने का भी मामला पकड़ा गया। एफएसडीए ने दवाओं के सैंपल लिए हैं जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा जाएगा।
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मंगलवार की शाम यह कार्रवाई एफएसडीए मुख्यालय से मिली गोपनीय सूचना पर की गई। सहायक औषधि आयुक्त संजय कुमार ने दोपहर में ही बड़ी ब्रह्मपुरी में ग्लोबल फार्मा को चिन्हित कराया फिर शाम को खुद औषधि निरीक्षक विवेक कुमार और उर्मिला वर्मा यहां पहुंचकर छापा मारा। टीम ने थोक सप्लायर के पूरे परिसर की घेराबंदी करने के बाद तलाशी शुरू कराई तो वहां एक्सपायरी दवाओं का भारी जखीरा बरामद हुआ। इनमें एंटीबायोटिक और कई तरह के सिरप के साथ जुकाम-बुखार की दवाएं तक शामिल थीं। इसके साथ मल्टी विटामिन, ताकत के सिरप, ग्लूकोज, कैलशियम, मिनरल पाउडर, कास्मेटिक, खाली कार्टन और तमाम दवाओं के फर्जी लेबिल भी बरामद किए गए। एफएसडीए की टीम ने बरामद की गई एक्सपायरी दवाओं की कीमत 60 हजार रुपये से ज्यादा आंकी।
थोक सप्लायर के यहां बड़े पैमाने पर फूड सप्लीमेंट भी बरामद होने के बाद सहायक आयुक्त संजय कुमार ने इसका लाइसेंस मांगा तो वहां मौजूद लोग नहीं दिखा पाए। सहायक आयुक्त की सूचना पर जिला अभिहित अधिकारी डीआर मिश्रा ने खाद्य सुरक्षा निरीक्षक मोनिका गुप्ता और अशोक कुमार को मौके पर भेजा जहां उन्होंने फूड सप्लीमेंट के नमूने भरे। ग्लोबल फार्मा के मालिक विनीत बिसारिया ने सफाई दी कि लॉकडाउन में एक्सपायर हुई दवाएं निस्तारित करने के लिए अलग रखी थीं लेकिन एफएसडीए ने उन्हें कार्रवाई में शामिल कर लिया। एफएसडीए अधिकारियों ने बताया कि भरे गए नमूनों की जांच लैब में होगी, रिपोर्ट आने पर विधिक कार्रवाई होगी।

बगैर लेबल की बोतलों ने खोली खराब दवाओं को मार्केट में उतारने की पोल

एफएसडीए की टीम को मौके पर ऐसी तमाम बोतलें और दवाएं मिलीं जिनके लेबिल हटा दिए थे। पूछताछ में पता चला कि एक्सपायरी दवाओं के लेबिल हटाकर उन पर नया लेबल लगा दिया जाता है और फिर उसे बाजार में सप्लाई कर दिया जाता है। थोक सप्लायर के यहां बड़े पैमाने पर खुली टेबलेट भी मिलीं। वह इस पर भी एफएसडीए को कोई जवाब नहीं दे पाया।

अधोमानक और एक्सपायर दवाएं मरीजों को फायदा करने के बजाय काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं। निष्प्रभावी होने के कारण एक्सपायर दवा मरीजों को धोखे में भी रखती है और उनके साइड एफेक्ट बढ़ जाते हैं। इसी वजह से एक्सपायर दवाओं का कारोबार बड़ा सामाजिक अपराध है। विभाग इस पर सख्त कार्रवाई करेगा। ग्लोबल फार्मा से बरामद दवाओं के बिल मांगे है। इसके लिए नोटिस भी जारी किया जाएगा। - संजय कुमार, सहायक आयुक्त औषधि

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