सिर्फ एक बार कैमरे में झलक दिखी मगर विशेषज्ञों को नहीं लगी भनक
बरेली। रबर फैक्टरी के जंगल में बाघिन ने एक बार फिर अपना मूवमेंट बदल दिया है। दो दिन पहले कोयला प्लांट के पास उसके पगमार्क मिलने के बाद विशेषज्ञों ने वहां उसे ट्रैंक्युलाइज करने का इंतजाम किया था मगर बाघिन की चालाकी के आगे यह योजना भी नाकाम हो गई। जिन दो पड्डों को तालाब किनारे बांधा गया था, बाघिन उनका शिकार करने नहीं पहुंची। वन विभाग के अफसरों के मुताबिक कोयला प्लांट में रेलवे इंजन के पास लगे सेंसर कैमरे की फुटेज में रात एक बजे बाघिन की एक झलक दिखी लेकिन बाघिन के वहां आने और चले जाने की विशेषज्ञों को भनक तक नहीं लग पाई।
बाघिन को ट्रैंक्युलाइज करने आए विशेषज्ञों ने बताया कि तालाब के पास दो पड्डे बांधे गए थे मगर उन पर हमला करना तो दूर बाघिन उनके आसपास तक नहीं पहुंची। इससे जाहिर है कि वह लगातार खतरा भांप रही है और बचाव की कोशिशों में जुटी हुई है। अब उसने अपना मूवमेंट कोयला प्लांट की ओर कर लिया है। शनिवार को कोयला प्लांट के पास जहां बाघिन के पगमार्क मिले थे, उससे कुछ दूर रेलवे इंजन के पास लगे सेंसर कैमरे में उसकी फुटेज रात करीब एक बजे देखी गई। बाघिन की इस चालाकी से अफसर भी हैरत में हैं। हालांकि उनका दावा है कि बाघिन के सभी मूवमेंट ट्रेस किए जा रहे हैं, जल्द ही उसे ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ लिया जाएगा।
अगर अब लौटी तो पकड़ी जाएगी
डीएफओ भरतलाल के मुताबिक बाघिन को उसी की चाल में फंसाकर जल्द पकड़ा जा सकता है। बाघिन के मूवमेंट बदलने से साफ है कि वह फिर कोयला प्लांट से पहले की तरह लौटकर रेस्क्यू क्षेत्र में जरूर आएगी। इस बार यहां आने के बाद वह भाग नहीं सकेगी।
कहीं अभियान पर पानी न फेर दे बारिश
फतेहगंज पश्चिमी। जल्द ही बारिश शुरू होने वाली है इसे देखते हुए अफसर परेशान हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर बारिश शुरू हो गई तो बाघिन को पकड़ना लगभग नामुमकिन हो जाएगा क्योंकि बारिश के मौसम में फैक्टरी की घनी झाड़ी में रह रहे तमाम और जीव-जन्तु भी खतरा बन सकते हैं। झाड़ी भी भीगकर बड़ी हो जाएंगी। ऐसी स्थिति में बाघिन को बेहोश करके पकड़ना मुश्किल होगा। बाघिन हमला भी कर सकती है।
बाघिन लगातार जगह बदल रही है जिसकी वजह से उसे रेस्क्यू करने में दिक्कत आ रही है। उम्मीद है कि एक बार फिर बाघिन वापस पुरानी जगह पर आएगी तभी रेस्क्यू किया जाएगा। फिलहाल पता लगाया जा रहा है कि उसकी लोकेशन अब कहां है। - ललित वर्मा, मुख्य वन संरक्षक